देहरादून। उत्तराखंड कैबिनेट की मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रशासनिक सुधार, औद्योगिक विस्तार, ऊर्जा नीति, शिक्षा और सामरिक ढांचे से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। कैबिनेट के फैसलों को स्वास्थ्य सेवाओं में मानवीय सुधार, निवेश के अनुकूल वातावरण, पर्यावरण संरक्षण और दीर्घकालिक विकास की दिशा में ठोस कदम माना जा रहा है। बैठक में लिए गए प्रत्येक निर्णय का राज्य के सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य पर दूरगामी प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।
स्वास्थ्य कर्मियों को बड़ी राहत, जनपद परिवर्तन की अनुमति
कैबिनेट ने चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य पर्यवेक्षकों को बड़ी राहत देते हुए महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। ऐसे स्वास्थ्य कर्मी, जिन्होंने अपने मूल संवर्ग में न्यूनतम पांच वर्ष की संतोषजनक सेवा पूरी कर ली है, उन्हें पूरे सेवाकाल में एक बार आपसी सहमति के आधार पर जनपद परिवर्तन की अनुमति दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इस निर्णय से कर्मचारियों की पारिवारिक और सामाजिक समस्याओं का समाधान होगा और स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यक्षमता में भी सुधार आएगा।
परियोजनाओं के लिए भूमि प्राप्ति की नई प्रक्रिया तय
राज्य में विकास परियोजनाओं को गति देने के उद्देश्य से कैबिनेट ने भू-स्वामियों से आपसी समझौते के आधार पर लघु, मध्यम और वृहद परियोजनाओं के लिए भूमि प्राप्त करने की प्रक्रिया को मंजूरी दी है। भूमि अर्जन अधिनियम, 2013 के तहत लंबी और जटिल प्रक्रिया के कारण परियोजनाओं में हो रही देरी को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। सरकार का मानना है कि आपसी सहमति से भूमि प्राप्त करने से मुकदमेबाजी कम होगी, परियोजनाओं की लागत घटेगी और जनहित की योजनाएं समय पर पूरी हो सकेंगी।
प्राग फार्म भूमि पर उद्योगों को बढ़ावा, शासनादेश में संशोधन
कैबिनेट ने उधमसिंहनगर जिले के प्राग फार्म की 1354.14 एकड़ भूमि को औद्योगिक आस्थान के रूप में विकसित करने से जुड़े शासनादेश में संशोधन को स्वीकृति दी है। संशोधित प्रावधानों के तहत औद्योगिक विकास विभाग के माध्यम से राजस्व विभाग की सहमति से समान प्रयोजन के लिए भूमि को उप-पट्टे पर देने की अनुमति प्रदान की गई है। इससे सिडकुल क्षेत्र में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलने और रोजगार के नए अवसर सृजित होने की संभावना है।
जनजाति बहुल जिलों में विभागीय ढांचे का पुनर्गठन
जनजाति कल्याण विभाग की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कैबिनेट ने विभागीय ढांचे के पुनर्गठन का निर्णय लिया है। देहरादून, चमोली, उधमसिंहनगर और पिथौरागढ़ जैसे अनुसूचित जनजाति बहुल जिलों में चार जिला जनजाति कल्याण अधिकारियों के पद सृजित किए गए हैं। इन पदों को सेवा नियमावली में शामिल करने के लिए उत्तराखंड जनजाति कल्याण राजपत्रित अधिकारी सेवा (संशोधन) नियमावली, 2025 के प्रख्यापन को मंजूरी दी गई है। इससे जनजातीय योजनाओं के संचालन और निगरानी में मजबूती आएगी।
भू-जल निकास पर जल मूल्य और प्रभार लागू
भू-जल के अनियंत्रित दोहन पर रोक लगाने और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कैबिनेट ने गैर-कृषिकारी उपयोग के लिए भू-जल निकास पर जल मूल्य और प्रभार की दरें तत्काल प्रभाव से लागू करने का निर्णय लिया है। यह प्रावधान उद्योगों, रेजीडेंशियल अपार्टमेंट, ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी, होटल, वॉटर एम्यूजमेंट पार्क, वाहन धुलाई केंद्र और स्वीमिंग पूल जैसी गतिविधियों पर लागू होगा। इसके साथ ही वाणिज्यिक, औद्योगिक और रेजीडेंशियल परियोजनाओं के लिए पांच हजार रुपये का पंजीकरण शुल्क भी निर्धारित किया गया है।
देहरादून में निजी विश्वविद्यालय को मंजूरी
राज्य को शिक्षा हब के रूप में विकसित करने की दिशा में कैबिनेट ने देहरादून में “जी.आर.डी. उत्तराखंड विश्वविद्यालय” नाम से निजी विश्वविद्यालय की स्थापना को मंजूरी दी है। प्रस्तावित विश्वविद्यालय का उद्देश्य शिक्षा में नवाचार, आधुनिक अध्यापन पद्धतियों को बढ़ावा देना, सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित वर्गों को शिक्षा उपलब्ध कराना तथा शोध और रोजगार के अवसर सृजित करना है। सरकार को उम्मीद है कि इससे उच्च शिक्षा के क्षेत्र में राज्य की पहचान मजबूत होगी।
चिन्यालीसौड़ और गौचर हवाई पट्टियां रक्षा मंत्रालय को लीज पर
सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए कैबिनेट ने उत्तरकाशी स्थित चिन्यालीसौड़ और चमोली स्थित गौचर हवाई पट्टियों को संयुक्त नागरिक और सैन्य संचालन के लिए एडवांस लैंडिंग ग्राउंड के रूप में रक्षा मंत्रालय को लीज पर हस्तांतरित करने पर सहमति दी है। इस फैसले से सीमावर्ती क्षेत्रों में हवाई कनेक्टिविटी, आपदा प्रबंधन और राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
उत्तराखंड ग्रीन हाइड्रोजन नीति, 2026 को मंजूरी
कैबिनेट ने राज्य में स्वच्छ और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए “उत्तराखंड ग्रीन हाइड्रोजन नीति, 2026” के प्रख्यापन को मंजूरी दी है। राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन नीति और मिशन के अनुरूप यह नीति जल विद्युत जैसे प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर हरित हाइड्रोजन उत्पादन को प्रोत्साहित करेगी। सरकार का मानना है कि इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी, जलवायु परिवर्तन से निपटने में सहयोग और राज्य में निवेश व रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
