Category: ब्लॉग

उत्तराखंड की खेल नीति में खेल मैदानों पर फोकस करने की जरूरत, मैदान बचेंगे, तभी खेल संस्कृति बचेगी

उत्तराखण्ड सहित पूरे देश में शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। आधुनिक सुविधाओं से लैस बहुमंजिला विद्यालय भवनों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन इस विकास की एक बड़ी कीमत बच्चे चुका रहे हैं। विद्यालयों से खेल के मैदान लगातार गायब होते जा रहे हैं। आज अनेक स्कूल ऐसे हैं, जहाँ बच्चों के […]

जाम में जकड़ा उत्तराखंड: बड़े शहरों के साथ-साथ प्रमुख पर्यटन और तीर्थ स्थलों पर जाम की समस्या बनी नासूर

अनिल चन्दोला देहरादून। शांत पहाड़ों, निर्मल नदियों और आध्यात्मिक यात्रा के लिए प्रसिद्ध उत्तराखंड का एक बड़ा हिस्सा इन दिनों भीषण ट्रैफिक जाम की समस्या से जूझ रहा है। मैदानी शहरों से लेकर पर्वतीय पर्यटन स्थलों और चारधाम यात्रा मार्गों तक वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि कई स्थानों पर […]

आपदाओं से जूझता आन्दोलनः चारों तरफ तबाही के निशान, 260 से ज्यादा की मौत, करोड़ों का नुकसान

अनिल चन्दोला, देहरादून। उत्तराखंड के लिए यह साल आपदा के दृष्टिकोण से बेहद मनहूस साबित हो रहा है। सितंबर आधा बीतने के बावजूद तेज बारिश हो रही हैं और उसके कारण अलग-अलग हिस्सों में बड़े पैमाने पर नुकसान भी हो रहा है। इस साल अब तक 260 से ज्यादा लोग आपदा में अपनी जान गंवा […]

देहरादून में आपदा से बड़े पैमाने पर नुकसान, अनियोजित विकास ने बढ़ाया दर्द, अब सबक लेने का वक्त

अनिल चन्दोला, देहरादून राजधानी देहरादून सोमवार को बादल फटने और अतिवृष्टि की विभीषिका से दहल उठी। देर रात हुई मूसलाधार बारिश ने टौंस, तमसा, रिस्पना और बिंदाल जैसी नदियों को उफान पर ला दिया। सहस्त्रधारा और रायपुर इलाकों में बाढ़ का पानी घरों, दुकानों और मंदिरों तक घुस गया। टपकेश्वर महादेव मंदिर का प्रांगण पानी […]

धराली से थराली तक: आपदा और उम्मीद के बीच पहाड़, हिमालय की गोद में बसे हमारे गांव कितने सुरक्षित

अनिल चन्दोला, देहरादून। उत्तराखंड की धरती एक बार फिर प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रही है। कभी गढ़वाल के उत्तरकाशी में धराली गाँव तो कभी चमोली का थराली, इन पहाड़ी इलाकों में बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि हिमालय की गोद में बसे हमारे गांव कितने सुरक्षित […]

आरक्षण का मुद्दा गरमाया

चुनाव प्रचार में इन दिनों आरक्षण का मुद्दा गरमाया हुआ है। प्रारंभिक तौर पर आरक्षण को सबसे निचले वर्गों की जातियों को आर्थिक तथा राजनीतिक संबल प्रदान करने के लिए वैधानिक तौर पर आरक्षण प्रदान किया गया था। बाद में आरक्षण का विस्तार होता गया और इसमें नये-नये जाति समूह शामिल होते चले गए।आरक्षण प्राप्त […]

जंगलों में आग, तबाही के बाद ही होते हैं बचाव और सुरक्षा को लेकर सचेत

उत्तराखंड के जंगलों में आग लगने की यह कोई पहली या नई घटना है। हर वर्ष गर्मी में कई जगहों पर आग लगने की वजह से आसपास का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। इस बार तापमान में बढ़ोतरी के साथ अभी ही राज्य में पांच सौ से ज्यादा आग लगने के मामले सामने आ चुके […]

सामाजिक-आर्थिक विकास का वाहक बन रहा मध्यम वर्ग

 -डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा माने या ना माने पर इसमें कोई दो राय नहीं कि किसी भी देश के आर्थिक-सामाजिक विकास में मध्यम वर्ग की प्रमुख भूमिका रही है। यह केवल हमारे देश के संदर्भ में ही नहीं अपितु समूचे विश्व की बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं का अध्ययन किया जाएगा तो कारण यही सामने आएगा। सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों […]

वन्‍यजीवों द्वारा मानवजीवन को खतरा, आखिर क्‍या है कुदरत का खेल

मानवी राजपूत मानव और वन्य जीव संघर्ष एक गम्भीर समस्या बन चुकी है। हालांकि वन्य जीवों के संरक्षण के लिए वन विभाग की भारी-भरकम मशीनरी लाखों रुपए खर्च करती है लेकिन वह भी इस गम्भीर समस्या के आगे असहाय नजर आ रही है। आए दिन शहरों में खतरनाक वन्य जीव घुस आते हैं और मनुष्यों […]

देश में चुनावी नवाचार एवं मतदान प्रतिशत

 -डॉ. सुभाष गंगवाल देश में लोकसभा 2024 के लिए 543 सीटों में से प्रथम चरण में लगभग 102 सीटों के लिए मतदान सम्पन्न हो चुका है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि मतदान का प्रतिशत पूर्व लोकसभा चुनाव 2019 की तुलना में लगभग 6 प्रतिशत कम हुआ है। प्रथम चरण में 64 प्रतिशत मतदान […]

Back To Top