देहरादून। पहाड़ की शांत वादियों से निकलकर उद्योग जगत में अपनी पहचान बनाने और हजारों लोगों के लिए रोजगार के अवसर खड़े करने वाले उत्तराखंड के उद्योगपति डॉ. केएस पंवार को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बड़ी उपलब्धि मिली है। ऑक्सफोर्ड में आयोजित प्रतिष्ठित समारोह में उन्हें महात्मा गांधी लीडरशिप अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। यह सम्मान न सिर्फ डॉ. पंवार की कारोबारी उपलब्धियों को पहचान देता है, बल्कि उत्तराखंड की उस प्रतिभा को भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर रेखांकित करता है, जिसने अपनी मेहनत और दूरदृष्टि के बूते अलग मुकाम बनाया है।
12 अगस्त को लॉर्ड मेयर ऑफ ऑक्सफोर्ड काउंसिल चैंबर में एनआरआई वेलफेयर सोसाइटी की ओर से आयोजित समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कचार, रोजगार सृजन और समाज के लिए उनके योगदान को देखते हुए यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया गया।
डॉ. पंवार ने अपने कारोबारी सफर में पॉलिगन कैमिकल्स से लेकलर सोशल फाइनेंस जैसे नवाचार आधारित प्रयासों तक कई क्षेत्रों में काम किया है। उनकी पहल ने न केवल कारोबारी गतिविधियों को विस्तार दिया, बल्कि बड़ी संख्या में लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्र,सत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा किए। यही वजह है कि उद्योग जगत में उन्हें एक ऐसे उद्यमी के तौर पर देखा जाता है, जिन्होंने सफलता को व्यापक सामाजिक सरोकारों से जोड़ने की कोशिश की।
पहाड़ की जमीन से शुरू हुआ सफर
रुद्रप्रयाग जिले से आने वाले डॉ. केएस पंवार की कहानी उत्तराखंड के उन युवाओं के लिए खास मायने रखती है, जो सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखते हैं। उन्होंने मुंबई में पॉलिगन कैमिकल्स के जरिए अपने कारोबारी सफर की शुरुआत की। इसके बाद लगातार नए उद्यम खड़े करते हुए उन्होंने अपने कारोबार का विस्तार किया और उद्योग जगत में मजबूत पहचान बनाई।
आज उनके विभिन्न कारोबारी उपक्रमों से बड़ी संख्या में लोग जुड़े हुए हैं। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के साथ-साथ उद्यमिता को बढ़ावा देने की उनकी कोशिशों ने उन्हें कारोबारी क्षेत्र में एक अलग पहचान दिलाई है।
सफलता के बाद भी पहाड़ से नाता कायम
बड़े कारोबारी मुकाम तक पहुंचने के बावजूद डॉ. पंवार का अपनी जड़ों से जुड़ाव उनकी शख्सियत का अहम पहलू है। मुंबई और देहरादून में कारोबारी गतिविधियों का विस्तार होने के बावजूद वह अपने पैतृक गांव से जुड़े हुए हैं। गांव में उन्होंने अपना घर बनाया है और बागवानी से भी जुड़े हैं।
यानी महानगरों की कारोबारी दुनिया में अपनी पहचान बनाने के बावजूद पहाड़ की मिट्टी से उनका रिश्ता कमजोर नहीं हुआ। यही जुड़ाव उनके व्यक्तित्व को बाकी कारोबारी हस्तियों से अलग बनाता है।
उद्योग के साथ रोजगार पर भी जोर
डॉ. पंवार की सोच सिर्फ कारोबार के विस्तार तक सीमित नहीं रही है। उत्तराखंड जैसे भौगोलिक चुनौतियों वाले राज्य में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने की जरूरत को वह लंबे समय से रेखांकित करते रहे हैं। उनका मानना है कि पहाड़ से पलायन की चुनौती का सामना स्थानीय स्तर पर आर्थिक अवसर बढ़ाकर किया जा सकता है।
उनके इसी व्यापक विजन और काम को अब ऑक्सफोर्ड के अंतरराष्ट्रीय मंच पर सम्मान मिला है। रुद्रप्रयाग से शुरू हुआ सफर ऑक्सफोर्ड तक पहुंचना इस बात की मिसाल है कि पहाड़ की प्रतिभा और मेहनत जब सही दिशा पाती है, तो उसकी पहचान किसी एक शहर या प्रदेश तक सीमित नहीं रहती।
