38वें राष्ट्रीय खेलों के भुगतान को अब तक भटक रहा प्रसिद्ध पांडवाज बैंड अब CM धामी से लगाई मदद की गुहार

38वें राष्ट्रीय खेलों के भुगतान को अब तक भटक रहा प्रसिद्ध पांडवाज बैंड अब CM धामी से लगाई मदद की गुहार

देहरादून। उत्तराखंड की लोकधुनों को आधुनिक संगीत के साथ देश-दुनिया तक पहुंचाने वाले चर्चित फोक-फ्यूजन बैंड पांडवाज़ (Pandavaas) ने 38वें राष्ट्रीय खेलों से जुड़े अपने काम का भुगतान लंबे समय से लंबित होने का मुद्दा सार्वजनिक रूप से उठाया है। पांडवाज़ ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को संबोधित करते हुए कहा है कि दिसंबर 2024 और जनवरी 2025 में किए गए कार्यों के बिल सितंबर 2026 तक लंबित हैं। बैंड के मुताबिक भुगतान हासिल करने के लिए कई स्तरों पर संपर्क करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ, जिसके बाद उसे सार्वजनिक मंच पर अपनी बात रखनी पड़ी है।

पांडवाज़ ने मुख्यमंत्री से इस मामले का संज्ञान लेकर संबंधित विभाग को आवश्यक निर्देश देने और लंबित भुगतान का शीघ्र समाधान कराने का अनुरोध किया है। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पांडवाज़ 2025 में उत्तराखंड में आयोजित 38वें राष्ट्रीय खेलों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का हिस्सा रहा था। उत्तराखंड सरकार के सूचना एवं लोक संपर्क विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक 28 जनवरी 2025 को देहरादून में हुए उद्घाटन समारोह में पांडवाज़ ने भी प्रस्तुति दी थी। इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय खेलों का उद्घाटन किया था।

राष्ट्रीय खेलों के लिए तैयार किया था ‘हल्ला धूम धड़क्का’

पांडवाज़ ने 38वें राष्ट्रीय खेलों के लिए ‘हल्ला धूम धड़क्का’ गीत का निर्माण किया था। पांडवाज़ के आधिकारिक चैनल पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार गीत के Lyrics और Composition सुशांत भट्ट के थे, जबकि Additional Lyrics प्रेम मोहन डोभाल और दीपक मेहता ने लिखे। शिवानी भागवत, ईशान डोभाल और सुशांत भट्ट ने इसे आवाज दी और Music ईशान डोभाल ने दिया। Production पांडवाज़ का था, जबकि Copyright उत्तराखंड के Sports Department के नाम दर्ज है।

गीत में खेल भावना के साथ उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को भी शामिल किया गया था। उस समय प्रकाशित रिपोर्टों में इसे खिलाड़ियों और युवाओं को समर्पित मोटिवेशनल गीत बताया गया था। पांडवाज़ का कहना है कि उसने राष्ट्रीय खेलों के लिए थीम सॉन्ग तैयार करने के साथ मशाल यात्रा से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों में प्रस्तुतियां दीं और उद्घाटन समारोह में भी भाग लिया।

पांडवाज़ का दावा- 20-21 महीने बाद भी नहीं मिला भुगतान

बैंड ने मुख्यमंत्री को संबोधित अपने सार्वजनिक संदेश में दावा किया है कि दिसंबर 2024 और जनवरी 2025 में किए गए कार्यों के बिल सितंबर 2026 तक लंबित हैं। इस हिसाब से करीब 20 से 21 महीने गुजर चुके हैं। पांडवाज़ का कहना है कि वह किसी अतिरिक्त सुविधा की मांग नहीं कर रहा, बल्कि किए गए काम का भुगतान चाहता है। बैंड ने सवाल उठाया है कि यदि राष्ट्रीय खेलों से जुड़े अन्य कलाकारों और वेंडर्स का भुगतान किया जा चुका है तो उसका भुगतान अभी तक लंबित क्यों है।

CM हेल्पलाइन से लेकर खेल विभाग तक संपर्क का दावा

पांडवाज़ के मुताबिक भुगतान के लिए अलग-अलग सरकारी स्तरों पर प्रयास किए गए। बैंड का कहना है कि उसने सीएम हेल्पलाइन, खेल विभाग, खेल मंत्री, संबंधित अधिकारियों और मुख्यमंत्री आवास स्थित हेल्पडेस्क तक मामला पहुंचाया।

बैंड ने आरोप लगाया कि सीएम हेल्पलाइन पर की गई पहली शिकायत बिना समाधान के बंद कर दी गई और दोबारा शिकायत किए जाने के बाद भी मामला लंबित रहा। पांडवाज़ का यह भी कहना है कि पहले विभाग की ओर से बजट उपलब्ध नहीं होने की बात कहते हुए सहयोग करने को कहा गया था। बैंड के अनुसार उसने उस समय परिस्थितियों को समझते हुए सहयोग किया, लेकिन अब फोन और संदेशों का भी जवाब नहीं मिल रहा है।

‘पहाड़ छोड़कर नहीं गए, यहीं रहकर संस्कृति के लिए काम कर रहे’

अपने संदेश में पांडवाज़ ने इस मामले को केवल भुगतान तक सीमित नहीं रखा। बैंड ने कहा कि वह पहाड़ छोड़कर नहीं गया और आज भी उत्तराखंड में रहकर लोकसंस्कृति, कला और अपनी मातृभूमि के लिए काम कर रहा है। बैंड के मुताबिक सोशल मीडिया पर इस तरह भुगतान का मामला उठाना उसकी पहली पसंद नहीं थी। आधिकारिक माध्यमों से समाधान नहीं मिलने के बाद सार्वजनिक रूप से मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की गई है।

2008 से उत्तराखंड के लोकसंगीत पर काम कर रहा पांडवाज़

पांडवाज़ उत्तराखंड का स्थापित folk-fusion band और music-video production group है। समूह की शुरुआत 2008 में हुई थी। इसका उद्देश्य उत्तराखंड के पारंपरिक लोकसंगीत और कला को आधुनिक प्रस्तुति के साथ आगे बढ़ाना तथा नई पीढ़ी और व्यापक दर्शकों तक पहुंचाना रहा है।  इसकी स्थापना भाइयों ईशान डोभाल, कुणाल डोभाल और सलिल डोभाल ने की थी। ईशान संगीत रचना से जुड़े हैं, कुणाल निर्देशन और performing arts से, जबकि सलिल cinematography और visual production से जुड़े हैं।  पांडवाज़ ने उत्तराखंड के पारंपरिक संगीत को contemporary arrangements के साथ पेश कर अपनी अलग पहचान बनाई है। जुलाई 2026 में देहरादून में केंद्र सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के लोक संवर्धन पर्व में भी बैंड ने प्रस्तुति दी थी।

अब मुख्यमंत्री से सीधे हस्तक्षेप की उम्मीद

पांडवाज़ ने अपने संदेश के अंत में मुख्यमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। बैंड का कहना है कि सभी आधिकारिक स्तरों पर प्रयास करने के बाद अब उसे मुख्यमंत्री से समाधान की उम्मीद है। अब इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि राष्ट्रीय खेलों से जुड़े पांडवाज़ के बिल किस स्तर पर और किन कारणों से लंबित हैं तथा भुगतान कब तक किया जाएगा। इस पर खेल विभाग या राज्य सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार रहेगा।

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