रुड़की। आईआईटी रुड़की के दीक्षांत समारोह 2026 के पहले दिन शनिवार को 1,277 स्नातक विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत कुमार डोभाल ने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान और तकनीकी कौशल का इस्तेमाल समाज तथा देश की बेहतरी के लिए करने का आह्वान किया। संस्थान ने विशिष्ट लोक सेवा के लिए डोभाल को ऑनोरिस कौसा यानी मानद उपाधि से भी सम्मानित किया।
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ और रक्षा मंत्रालय के सैन्य मामलों के विभाग के सचिव जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि समारोह में विशिष्ट अतिथि रहे। भारत के पूर्व सॉलिसिटर जनरल एवं आईआईटी रुड़की के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष एडवोकेट हरीश साल्वे ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। अतिथियों ने विद्यार्थियों को शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए बधाई देते हुए नवाचार, नेतृत्व, ईमानदारी और राष्ट्र सेवा को जीवन में महत्व देने का संदेश दिया।
ज्ञान के साथ समाज के प्रति जिम्मेदारी भी लेकर निकल रहे विद्यार्थी: डोभाल
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत कुमार डोभाल ने अपने दीक्षांत संबोधन में कहा कि आईआईटी रुड़की ने शिक्षा, अनुसंधान और तकनीकी नवाचार के माध्यम से देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यहां से निकलने वाले विद्यार्थी अपने साथ केवल ज्ञान और कौशल ही नहीं, बल्कि उनका उपयोग व्यापक जनहित में करने की जिम्मेदारी भी लेकर जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भारत की चुनौतियों का समाधान तलाशने के लिए ऐसे युवा पेशेवरों और शोधकर्ताओं की जरूरत है, जो नए ढंग से सोचें, ईमानदारी से काम करें और स्पष्ट उद्देश्य के साथ योगदान दें। डोभाल ने सभी स्नातक विद्यार्थियों को उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। समारोह के दौरान उन्हें प्रदान की गई मानद उपाधि पहले दिन के प्रमुख आकर्षणों में रही।
युवा पीढ़ी की क्षमता और प्रतिबद्धता से तय होती है देश की प्रगति: सीडीएस
जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि ने कहा कि किसी भी देश की उन्नति में युवा पीढ़ी के ज्ञान, क्षमताओं और प्रतिबद्धता की निर्णायक भूमिका होती है। आईआईटी रुड़की जैसे संस्थान युवाओं को प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और नवाचार के जरिए नई चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करते हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने कार्यक्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल करने के साथ समाज और राष्ट्र के प्रति दायित्वों को भी समझें। उन्होंने स्नातक विद्यार्थियों की उपलब्धि को उनके जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव बताते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
हर चुनौती का तैयार जवाब नहीं मिलेगा, असफलताओं से भी सीखें: साल्वे
बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष हरीश साल्वे ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह वर्षों की मेहनत, अनुशासन और दृढ़ता का परिणाम है। आईआईटी रुड़की की समृद्ध विरासत ने देश की तकनीकी और बौद्धिक प्रगति को दिशा देने में अहम योगदान दिया है।
उन्होंने कहा कि संस्थान के परिचित वातावरण से बाहर निकलने के बाद विद्यार्थियों को ऐसी परिस्थितियां भी मिलेंगी, जहां हर प्रश्न का सरल उत्तर और आगे बढ़ने का तय रास्ता उपलब्ध नहीं होगा। ऐसी चुनौतियों से घबराने के बजाय उन्हें सीखने का अवसर मानना चाहिए।
साल्वे ने कहा कि सफलताएं महत्वपूर्ण हैं, लेकिन असफलताएं भी व्यक्तित्व को मजबूत करने, सोच का दायरा बढ़ाने और संकल्प को दृढ़ बनाने वाले सबक देती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से उत्कृष्टता, ईमानदारी और जिम्मेदारी के मूल्यों को बनाए रखने की अपेक्षा की तथा उनके परिवारों को भी बधाई दी।
तकनीकी दक्षता के साथ जिम्मेदार नवाचार पर जोर: प्रो. पंत
आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. केके पंत ने कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के साथ उनके परिवारों, शिक्षकों और पूरे संस्थान के लिए गर्व का अवसर है। डिग्री प्राप्त करना पढ़ाई के एक चरण की समाप्ति के साथ उस नई यात्रा की शुरुआत भी है, जिसमें विद्यार्थी अपनी रचनात्मकता, ज्ञान और मूल्यों से समाज को लाभ पहुंचा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि संस्थान का प्रयास ऐसे युवाओं को तैयार करना है, जो तकनीकी ज्ञान के साथ स्वतंत्र और आलोचनात्मक सोच रखें, जिम्मेदारी से नवाचार करें तथा जटिल समस्याओं का समाधान तलाश सकें। उन्होंने विश्वास जताया कि यहां से निकलने वाले विद्यार्थी उत्कृष्टता और सेवा की संस्थागत परंपरा को अपने कार्यों से आगे बढ़ाएंगे।
पहली बार बीएस-एमएस डिग्री, दो दिनों में बन रहा नया रिकॉर्ड
आईआईटी रुड़की इस वर्ष दो दिवसीय दीक्षांत समारोह में कुल 2,701 डिग्रियां प्रदान कर रहा है। यह संस्थान में अब तक प्रदान की गई डिग्रियों की सर्वाधिक संख्या है। इस बार पांच वर्षीय ड्युअल डिग्री कार्यक्रम के अंतर्गत पहली बार बीएस-एमएस डिग्री भी दी जा रही है। पहले दिन बी.आर्क, बी.टेक, इंटीग्रेटेड एम.टेक, इंटीग्रेटेड एम.एससी., आईडीडी, बीएस-एमएस और बी.एस. सहित विभिन्न कार्यक्रमों के विद्यार्थियों को डिग्रियां मिलीं। कुल 1,277 स्नातक विद्यार्थियों में 1,001 छात्र और 276 छात्राएं शामिल हैं।
श्रीवरदन बालाजी को प्रेसीडेंट गोल्ड मेडल
बीएस-एमएस केमिकल साइंसेज के विद्यार्थी श्रीवरदन बालाजी को प्रेसीडेंट गोल्ड मेडल प्रदान किया गया। उन्हें जेईई एडवांस्ड के माध्यम से प्रवेश लेने वाले स्नातक विद्यार्थियों में सर्वाधिक सीजीपीए हासिल करने पर यह सम्मान मिला। नवनीत कुमार को डायरेक्टर गोल्ड मेडल और आशी जैन को भारत के राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा गोल्ड मेडल दिया गया। रूपम तनेजा ने इंस्टीट्यूट सिल्वर मेडल तथा सुकृत जिंदल ने इंस्टीट्यूट ब्रॉन्ज मेडल प्राप्त किया।
अनुसंधान और स्टार्टअप को बढ़ावा, 144 पेटेंट स्वीकृत
संस्थान की ओर से साझा उपलब्धियों के अनुसार, वर्ष के दौरान 136 पेटेंट आवेदन दाखिल किए गए और 144 पेटेंट स्वीकृतियां प्राप्त हुईं। इसके अलावा शिक्षकों के नेतृत्व वाले 11 स्टार्टअप की स्थापना में सहयोग दिया गया। क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स में संस्थान ने वैश्विक स्तर पर 335वां और राष्ट्रीय स्तर पर सातवां स्थान हासिल किया। एनआईआरएफ 2025 में आईआईटी रुड़की ओवरऑल श्रेणी में सातवें और इंजीनियरिंग में छठे स्थान पर रहा, जबकि वास्तुकला में लगातार पांचवें वर्ष पहला स्थान बरकरार रखा।
20 सितंबर को 1,424 विद्यार्थियों को मिलेंगी स्नातकोत्तर और पीएचडी डिग्रियां
पहले दिन समारोह में संस्थान स्तर के पदक और पुरस्कार प्रदान किए गए। मुख्य अतिथि के संबोधन और स्नातक डिग्रियों के वितरण के साथ विद्यार्थियों ने शपथ भी ग्रहण की। अन्य पदकों और पुरस्कारों के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।
संस्थान ने विद्यार्थियों की शैक्षणिक यात्रा में योगदान देने वाले शिक्षकों, मार्गदर्शकों, कर्मचारियों और परिवारों के प्रति आभार जताया। शिक्षा जगत, उद्योग, अनुसंधान और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में विद्यार्थियों के सार्थक योगदान की अपेक्षा भी व्यक्त की गई।
दीक्षांत समारोह के दूसरे दिन, 20 सितंबर 2026 को, 1,424 विद्यार्थियों को स्नातकोत्तर और पीएचडी की डिग्रियां प्रदान की जाएंगी। इस दौरान विभिन्न विषयों में शोध और शैक्षणिक उपलब्धियों को सम्मानित किया जाएगा।
