देहरादून। उत्तराखंड में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को राज्य की विकास जरूरतों से जोड़ने की दिशा में 21वें उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन (USSTC-2026) का शनिवार को विज्ञान धाम, देहरादून में शुभारंभ हुआ। दो दिवसीय सम्मेलन में वैज्ञानिक अनुसंधान, नई तकनीक, नवाचार और हिमालयी क्षेत्र की चुनौतियों पर विशेषज्ञों के बीच विचार-विमर्श हो रहा है। सम्मेलन में 13 तकनीकी प्रभागों के तहत 260 से अधिक शोध-पत्र प्रस्तुत किए जा रहे हैं।
उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वीडियो संदेश के माध्यम से प्रतिभागियों को संबोधित किया। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
समस्याओं की पहचान से समाधान तक पहुंचने पर जोर
प्रदीप बत्रा ने कहा कि उत्तराखंड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान का उद्देश्य केवल शोध तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे समाज और स्थानीय जरूरतों से जोड़कर व्यावहारिक समाधान विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में मौजूद समस्याओं की पहचान कर उनके वैज्ञानिक और व्यावहारिक समाधान तलाशने पर जोर दिया। उनके अनुसार विज्ञान एवं तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल राज्य की जरूरतों के अनुरूप किया जाना जरूरी है।
शोधकर्ताओं को मिला संवाद का बड़ा मंच
सम्मेलन में वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों, विद्यार्थियों, नवाचारकर्ताओं, नीति-निर्माताओं और उद्यमियों की भागीदारी है। आयोजकों के अनुसार करीब 1,000 प्रतिभागियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। सम्मेलन के पहले दिन 13 तकनीकी क्षेत्रों में 260 से अधिक शोध-पत्रों की मौखिक और पोस्टर प्रस्तुतियां हुईं।
इनमें कृषि, पर्यावरण, वानिकी, जैव प्रौद्योगिकी, रसायन विज्ञान, भू-विज्ञान, इंजीनियरिंग, पदार्थ विज्ञान, नैनो प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, गणित, कंप्यूटर विज्ञान, चिकित्सा, भौतिक विज्ञान, ग्रामीण विज्ञान और प्राणी विज्ञान जैसे विषय शामिल हैं। शोध प्रस्तुतियों के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों में हो रहे काम और उनके संभावित व्यावहारिक उपयोग पर चर्चा का अवसर मिला।
AI, साइबर तकनीक और आपदा प्रबंधन भी चर्चा के केंद्र में
इस बार सम्मेलन में पारंपरिक विज्ञान विषयों के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर-फिजिकल सिस्टम, STEM, रक्षा क्षेत्र में तकनीक और हिमालयी क्षेत्रों में आपदा-सहिष्णुता जैसे विषय भी चर्चा के दायरे में हैं। सम्मेलन की पूर्व जानकारी के मुताबिक विभिन्न मंथन सत्रों में हिमालयी क्षेत्र के सतत विकास, अनुसंधान एवं विकास और विज्ञान-तकनीक आधारित समाधान जैसे मुद्दे भी शामिल किए गए हैं।
उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य के लिए आपदा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण, कृषि, स्वास्थ्य और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े तकनीकी समाधान विशेष महत्व रखते हैं। सम्मेलन में इन्हीं क्षेत्रीय जरूरतों को अनुसंधान और नवाचार से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
विज्ञान नीति और ‘विकसित भारत, सशक्त उत्तराखंड 2047’ पर चर्चा
सम्मेलन में ‘विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति : विकसित भारत, सशक्त उत्तराखंड 2047’ विषय पर भी मंथन किया गया। इसमें यह चर्चा हुई कि वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी उपलब्धियों को राज्य की विकास प्राथमिकताओं के साथ किस तरह जोड़ा जा सकता है।
यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नीति-2026 के उद्देश्यों और अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने वैज्ञानिक संस्थानों के बीच सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान की आवश्यकता पर जोर दिया।
विज्ञान और आम लोगों के बीच संवाद पर भी फोकस
सम्मेलन में विज्ञान संचार को लेकर भी विशेष सत्र आयोजित किया गया। इसमें मीडिया और विज्ञान जगत के बीच बेहतर संवाद, वैज्ञानिक उपलब्धियों को आम लोगों तक सरल भाषा में पहुंचाने और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
इस सत्र में यह पहलू भी सामने आया कि वैज्ञानिक अनुसंधान का लाभ तभी व्यापक स्तर पर पहुंच सकता है, जब उसकी जानकारी शोध संस्थानों और विशेषज्ञों से निकलकर आम समाज तक सरल और समझने योग्य रूप में पहुंचे।
‘विज्ञान सेतु’ और ‘लैब ऑन व्हील्स’ जैसी पहल
यूकॉस्ट की ओर से ‘विज्ञान सेतु’ पहल के बारे में भी जानकारी दी गई। इसका उद्देश्य विज्ञान और समाज के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करना तथा वैज्ञानिक ज्ञान और उपलब्धियों को व्यापक स्तर तक पहुंचाना है।
इसके अलावा ‘लैब ऑन व्हील्स’ अभिमुखीकरण कार्यक्रम भी सम्मेलन का हिस्सा है। इसके जरिए विद्यार्थियों और आम लोगों तक प्रयोगात्मक एवं अनुभव आधारित विज्ञान शिक्षा की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
60 से ज्यादा संस्थानों और स्टार्टअप्स की प्रदर्शनी
सम्मेलन स्थल पर 60 से अधिक वैज्ञानिक एवं शिक्षण संस्थानों और स्टार्टअप्स ने प्रदर्शनी लगाई है। यहां अनुसंधान परियोजनाओं, तकनीकी नवाचारों, वैज्ञानिक उपलब्धियों और नए समाधानों को प्रदर्शित किया गया।
प्रदर्शनी के जरिए शोधकर्ताओं और संस्थानों को अपने काम को दूसरे विशेषज्ञों के सामने रखने तथा भविष्य में सहयोग की संभावनाएं तलाशने का अवसर मिल रहा है।
युवाओं को विज्ञान से जोड़ने के लिए प्रीमियर लीग
सम्मेलन के दौरान द्वितीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रीमियर लीग का भी आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य विशेष रूप से युवाओं में विज्ञान के प्रति रुचि और वैज्ञानिक गतिविधियों में भागीदारी बढ़ाना है।
आयोजन में विज्ञान को केवल कक्षा या प्रयोगशाला तक सीमित रखने के बजाय उसे संवाद और सहभागिता के माध्यम से युवाओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
उत्तराखंड के लिए क्या है सम्मेलन का महत्व?
उत्तराखंड में विज्ञान और तकनीक के सामने एक तरफ हिमालयी क्षेत्र की भौगोलिक और पर्यावरणीय चुनौतियां हैं, तो दूसरी तरफ कृषि, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, आपदा प्रबंधन और रोजगार जैसे क्षेत्र हैं। ऐसे में सम्मेलन में प्रस्तुत शोध और तकनीकी विचारों का वास्तविक महत्व इस बात से जुड़ता है कि उन्हें राज्य की इन जरूरतों के समाधान में किस तरह इस्तेमाल किया जा सके।
21वां उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन इसी उद्देश्य से वैज्ञानिक समुदाय, शिक्षण संस्थानों, सरकार, उद्योग, स्टार्टअप्स और समाज के बीच संवाद का मंच उपलब्ध करा रहा है। सम्मेलन 25 और 26 अक्टूबर को विज्ञान धाम, देहरादून में आयोजित किया जा रहा है।
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