देहरादून/श्री बदरीनाथ धाम। उत्तराखंड के विश्वप्रसिद्ध श्री बदरीनाथ धाम में चढ़ावे और दान को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कथित हेराफेरी के आरोपों को श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने गंभीरता से लिया है। समिति ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश देते हुए आंतरिक जांच समिति गठित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बीकेटीसी का कहना है कि यदि जांच में किसी भी कर्मचारी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित आरोपों के आधार पर संबंधित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और किसी भी स्तर पर दोष सिद्ध होने पर कठोर कार्रवाई से पीछे नहीं हटेंगे।
उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रसारित उस दावे का भी खंडन किया, जिसमें एक कर्मचारी को उनका निजी सचिव बताया गया है। अध्यक्ष ने कहा कि संबंधित व्यक्ति उनका निजी सचिव नहीं, बल्कि मंदिर समिति का नियमित सरकारी कर्मचारी है, जो पूर्व में भी कई अध्यक्षों के साथ वैयक्तिक सहायक के रूप में कार्य कर चुका है। यदि जांच में उसके खिलाफ लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो उसके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने बताया कि सोशल मीडिया पर मामला सामने आने के बाद बदरीनाथ मंदिर परिसर के सीसीटीवी फुटेज की जांच कराई गई। हालांकि उपलब्ध फुटेज पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन पूरे घटनाक्रम की जानकारी बीकेटीसी अध्यक्ष को दे दी गई है।
उन्होंने बताया कि अध्यक्ष के निर्देश पर कर्मचारियों से स्पष्टीकरण लिया जा रहा है और विस्तृत जांच के लिए समिति गठित की जा रही है। जांच समिति उपलब्ध साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और संबंधित पक्षों के बयान के आधार पर अपनी रिपोर्ट देगी।
रांगड़ ने कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति अधिनियम, 1939 तथा कर्मचारी आचरण नियमावली के तहत दोषियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने अपील की कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में जांच पूरी होने से पहले किसी भी अपुष्ट या भ्रामक जानकारी को प्रसारित करने से बचना चाहिए। तथ्यों की पुष्टि के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित होगा, ताकि श्री बदरीनाथ धाम की गरिमा और श्रद्धालुओं की भावनाओं पर प्रतिकूल असर न पड़े।
