देहरादून। उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी तैयारियों को समय से पहले गति दे दी है। पार्टी अब उन 23 विधानसभा क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रही है, जहां उसे पिछले विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। इन सीटों पर संगठन को मजबूत करने और चुनावी समीकरण अपने पक्ष में करने के लिए वरिष्ठ नेताओं को सीधे जिम्मेदारी सौंपने का निर्णय लिया गया है।
बताया जा रहा है कि नई रणनीति के तहत प्रत्येक कमजोर सीट के लिए अलग-अलग प्रभारी नियुक्त किए जाएंगे। इनमें मुख्यमंत्री, सांसद, मंत्री और संगठन के अनुभवी नेता शामिल हैं। इनकी जिम्मेदारी केवल चुनाव के समय प्रचार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे विधानसभा क्षेत्र में संगठन को सक्रिय रखना, स्थानीय मुद्दों की पहचान करना और कार्यकर्ताओं के साथ नियमित संवाद बनाए रखना भी होगी।
पार्टी नेतृत्व का मानना है कि केवल सरकारी उपलब्धियों के भरोसे चुनाव नहीं जीते जा सकते। इसलिए संगठनात्मक स्तर पर लगातार समीक्षा, क्षेत्रवार रिपोर्ट और बूथ स्तर तक सक्रियता बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। जिन क्षेत्रों में भाजपा पिछली बार अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी, वहां विशेष अभियान चलाकर स्थानीय समीकरणों का नए सिरे से आकलन किया जाएगा।
भाजपा युवाओं तक अपनी पहुंच बढ़ाने की दिशा में भी नई योजना पर काम कर रही है। खासतौर पर पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं और जनरेशन-ज़ेड को जोड़ने के लिए विधानसभा स्तर पर संवाद कार्यक्रम, डिजिटल अभियान और संगठनात्मक गतिविधियां आयोजित करने की तैयारी है। इसके साथ ही लंबे समय से निष्क्रिय पड़े पुराने कार्यकर्ताओं को भी दोबारा सक्रिय भूमिका में लाने की रणनीति बनाई गई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा का यह कदम केवल हारी हुई सीटों की भरपाई तक सीमित नहीं है, बल्कि 2027 में लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी के लक्ष्य को ध्यान में रखकर तैयार की गई व्यापक चुनावी रणनीति का हिस्सा है। यदि सीटवार निगरानी, संगठन विस्तार और स्थानीय नेतृत्व के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होता है, तो इन 23 सीटों पर मुकाबला पिछले चुनाव की तुलना में कहीं अधिक दिलचस्प हो सकता है।
