देहरादून। उत्तराखंड में बिना मान्यता और तय शैक्षणिक मानकों के बिना संचालित मदरसों के खिलाफ धामी सरकार की कार्रवाई लगातार तेज हो रही है। देहरादून और हल्द्वानी में नई कार्रवाई के बाद प्रदेश में अब तक 17 मदरसे सील किए जा चुके हैं, जबकि तीन संस्थानों के प्रबंधकों ने लिखित अंडरटेकिंग देकर संचालन बंद कर दिया है। इस तरह कुल 20 बिना मान्यता संचालित मदरसों का संचालन रुकवाया जा चुका है।
राज्य में मदरसा शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के बाद प्रशासन ने मान्यता संबंधी दस्तावेजों, शैक्षणिक मानकों और संस्थानों के संचालन की जांच शुरू की थी। एक जुलाई 2026 से पुरानी मदरसा बोर्ड व्यवस्था समाप्त कर राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की नई व्यवस्था लागू की गई है। इसके बाद सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को तय प्रक्रिया और मानकों के अनुरूप मान्यता लेने की व्यवस्था में आना है।
सितंबर के शुरुआती दिनों में रुद्रपुर में दो मदरसे सील किए जाने के साथ कार्रवाई की शुरुआत हुई थी। इसके बाद रुड़की और अन्य जिलों में भी दस्तावेजों की जांच तथा नोटिस की कार्रवाई तेज हुई। चार सितंबर तक प्रदेश में 13 मदरसे सील किए जाने की जानकारी सामने आई थी। अब देहरादून और हल्द्वानी में हुई कार्रवाई के बाद बंद कराए गए बिना मान्यता मदरसों की संख्या 20 तक पहुंच गई है।
देहरादून में एक मदरसा सील, दो ने दी संचालन बंद करने की लिखित सूचना
अल्पसंख्यक मामलों के सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि देहरादून में तीन मदरसों के संबंध में कार्रवाई की गई है। आजाद कॉलोनी स्थित मदरसा जामिया-तुस-सलाम अल-इस्लामिया को सील कर दिया गया।
वहीं, आजाद कॉलोनी, माजरा स्थित मदरसा दार-ए-अरकम और मदरसा दारूल उलूम रहीमिया के प्रबंधकों ने मदरसों का संचालन बंद करने संबंधी लिखित अंडरटेकिंग प्रशासन को दी है।
हल्द्वानी में दो मदरसों पर सीलिंग की कार्रवाई
नैनीताल जिले के हल्द्वानी में भी दो बिना मान्यता संचालित मदरसों को सील किया गया है। इनमें शनि बाजार रोड, गौजाजाली उत्तर स्थित मदरसा जामिया नूरिया बरकाते आमिना और इंदिरा नगर, बनभूलपुरा में संचालित एक मदरसा शामिल है।
हल्द्वानी नगर मजिस्ट्रेट ए.बी. वाजपेयी के अनुसार, संबंधित प्रबंधकों से मान्यता से जुड़े जरूरी अभिलेख मांगे गए थे। तय समय में दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने पर नियमानुसार सीलिंग की कार्रवाई की गई।
मान्यता के बिना नहीं चलने दिया जाएगा कोई शिक्षण संस्थान
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में कोई भी शिक्षण संस्थान मान्यता और निर्धारित नियमों के बिना संचालित नहीं होने दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और तय मानकों के अनुरूप शिक्षा सुनिश्चित करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों के भविष्य और शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जाएगा। नियमों का उल्लंघन कर चल रहे संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
