उत्तराखंड में रिसर्च आधारित नीति निर्माण पर जोर, सीएम धामी ने कहा- योजनाओं की हो वार्षिक मॉनिटरिंग

उत्तराखंड में रिसर्च आधारित नीति निर्माण पर जोर, सीएम धामी ने कहा- योजनाओं की हो वार्षिक मॉनिटरिंग

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों, चुनौतियों और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप शोध आधारित नीति निर्माण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों, विशेषज्ञ संस्थानों और शोध अध्ययनों से मिलने वाले निष्कर्षों का प्रभावी इस्तेमाल सरकारी नीतियों और योजनाओं को बेहतर बनाने में किया जाना चाहिए।

सचिवालय में उत्तराखंड स्टेट सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी एंड गुड गवर्नेंस (USCPPGG) की शासी निकाय बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने योजनाओं के नियमित मूल्यांकन और निर्धारित लक्ष्यों की वार्षिक मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने ‘Uttarakhand at 25: A Himalayan State with Infinite Possibilities’ पुस्तक का भी विमोचन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के समग्र और दीर्घकालिक विकास के लिए डेटा, शोध और नवाचार आधारित दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है। राज्य की उपलब्धियों और विभिन्न क्षेत्रों में हुए उल्लेखनीय कार्यों पर केस स्टडी तैयार करने के निर्देश देते हुए उन्होंने जिला और ब्लॉक स्तर तक अधिकारियों के प्रशिक्षण व क्षमता विकास पर विशेष ध्यान देने को कहा।

बैठक में राज्य के प्रमुख विश्वविद्यालयों के हर वर्ष 10 स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को कैपस्टोन परियोजनाओं के लिए स्टाइपेंड देने पर सहमति बनी। इसके जरिए राज्य की प्राथमिकताओं से जुड़े विषयों पर शोध और नवाचार आधारित परियोजनाओं को प्रोत्साहन दिया जाएगा।

शासी निकाय के सदस्यों ने हाई वैल्यू-लो वॉल्यूम उत्पादों, एमएसएमई और पर्वतीय क्षेत्रों में होम टूरिज्म को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उनका मानना था कि इन क्षेत्रों पर केंद्रित नीति से स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं।

बैठक में राज्य के भविष्य के विकास से जुड़े आठ प्रमुख सुधार क्षेत्रों पर विस्तृत अध्ययन कराने का सुझाव भी दिया गया। सदस्यों ने कहा कि योजनाओं के प्रभाव का समय-समय पर आकलन होना चाहिए, ताकि जरूरत के अनुसार नीतियों में सुधार किया जा सके। मृदा संरक्षण, स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती, पर्यावरण संरक्षण और अधिकारियों के प्रशिक्षण को भी प्रमुख फोकस एरिया में रखने की बात कही गई।

विकसित उत्तराखंड-2047 के रोडमैप पर चर्चा करते हुए आर्थिक विकास एवं रोजगार, मानव संसाधन व कल्याण, वन-जैव विविधता, जलवायु अनुकूलन, अवस्थापना विकास, स्थानीय स्वशासन और तकनीक आधारित सुशासन पर विशेष फोकस करने पर सहमति बनी। बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि आर्थिक प्रगति के साथ पर्यावरणीय संतुलन और सतत विकास को प्राथमिकता दी जाए।

यूएससीपीपीजीजी और यूएनडीपी के सहयोग से सतत विकास लक्ष्यों के क्रियान्वयन, स्थानीयकरण और मॉनिटरिंग पर हो रहे कार्यों की भी समीक्षा की गई। बैठक में बताया गया कि सतत विकास लक्ष्यों के क्षेत्र में उत्तराखंड हिमालयी राज्यों में पहले स्थान पर है।

मुख्यमंत्री ने शासी निकाय के सदस्यों के सुझावों का परीक्षण कर उपयोगी प्रस्तावों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य के विकास को नई गति देने के लिए शोध, नवाचार, क्षमता विकास और योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन लगातार मजबूत किया जाना चाहिए।

बैठक में विधायक उमेश शर्मा काऊ, विधायक डॉ. प्रमोद नैनवाल, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, पूर्व मुख्य सचिव एन. रविशंकर, प्रमुख सचिव डा. आर मीनाक्षी सुंदरम, पंतनगर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीएस कश्यप, एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक प्रो. डॉ. मीनू सिंह समेत विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञ और अधिकारी मौजूद रहे।

 

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