देहरादून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना पर उत्तराखंड की धामी सरकार ने पानी फेर दिया। जो परियोजना अब तक पूरी हो जानी चाहिए थी, उस पर आधा काम भी नहीं हुआ। कार्यदायी संस्था ने 21 करोड़ रुपये से ज्यादा की धनराशि भी होल्ड कर ली। इस पर सख्ती दिखाते हुए जिलाधिकारी देहरादून डा. आशीष चौहान ने कार्यदायी संस्था को कड़ी फटकार लगाते हुए काम में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, उन्होंने हर 15 दिन में निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा करने के निर्देश भी दिए हैं। हालांकि कार्यदायी संस्था पर इसका कितना असर होगा, यह आने वाले समय में ही पता चलेगा।
मामला भारत सरकार के महत्वाकांक्षी स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से जुड़ा है, जिसके तहत राजधानी देहरादून में उत्तराखंड की पहली इंटीग्रेटेड ग्रीन बिल्डिंग का निर्माण होना है। परियोजना में अब तक केवल 40.5 प्रतिशत निर्माण पूरा होने पर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के सीईओ एवं जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कार्यदायी संस्था को कड़ी फटकार लगाई है। पर्याप्त बजट उपलब्ध होने के बावजूद काम में देरी पर उन्होंने उच्च स्तरीय जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों से वसूली की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
निर्माण कार्यों की समीक्षा बैठक में डीएम ने कहा कि ग्रीन बिल्डिंग राज्य की महत्वपूर्ण और महत्वाकांक्षी परियोजना है। उन्होंने केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) के मुख्य अभियंता को निर्माण में देरी और लापरवाही की जांच कराने को कहा। साफ किया कि जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
हर 15 दिन में होगी प्रोजेक्ट की समीक्षा
डीएम ने कार्यदायी संस्था को सभी लंबित औपचारिकताएं तत्काल पूरी करने और साइट पर पर्याप्त श्रमिक, मशीनरी तथा निर्माण सामग्री उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अब वह स्वयं हर 15 दिन में परियोजना की प्रगति की समीक्षा करेंगे। तय रफ्तार से काम आगे नहीं बढ़ा तो संस्था के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
21 करोड़ रुपये रोके रखने पर मांगा जवाब
बैठक में यह भी सामने आया कि कार्यदायी संस्था ने परियोजना की 21 करोड़ रुपये की धनराशि होल्ड कर रखी है। इस पर डीएम ने जवाब तलब करते हुए कहा कि पैसे की कमी न होने के बावजूद निर्माण में देरी गंभीर लापरवाही है। कार्यदायी संस्था को भवन निर्माण समयबद्ध रूप से पूरा करने की जिम्मेदारी निभानी होगी।
जून में शुरू होने वाले काम अभी तक बाकी
एक्सटर्नल सीवरेज सिस्टम, टाइल वर्क, साइट पर जरूरी तैनाती और डोर शटर फिटिंग जैसे कार्य जून तक शुरू हो जाने चाहिए थे, लेकिन वे अब तक शुरू नहीं हो सके हैं। इसके अलावा प्रगति दर्शाने वाले पर्ट चार्ट में भ्रामक और गलत जानकारी देने का मामला भी सामने आया। डीएम ने संबंधित एजेंसियों और अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
बैठक में स्मार्ट सिटी के तहत संचालित ई-बसों की भी समीक्षा की गई। डीएम ने निर्धारित रूटों पर ई-बसों का नियमित संचालन सुनिश्चित करने और जो बसें संचालन में नहीं हैं, उनका स्पष्ट कारण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
बैठक में संयुक्त मजिस्ट्रेट हर्षिता सिंह, सीपीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता देवेंद्र प्रकाश, स्मार्ट सिटी के एसीईओ तीर्थ पाल सिंह, एजीएम आईटी मनवीर जोशी और एजीएम वाटर वर्क केपी चमोला समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
