गोपेश्वर। मां नंदा देवी की बड़ी जात यात्रा के पड़ावों में आस्था, लोकपरंपराओं और हिमालयी संस्कृति की छटा लगातार गहरी होती जा रही है। बधाण क्षेत्र की मां राजराजेश्वरी नंदा डोली अपने मायके पक्ष के अंतिम पड़ाव को पार कर ससुराल क्षेत्र में प्रवेश कर चुकी है। डोली के पहुंचने पर गांवों में उत्साह का माहौल है।
परंपरा के अनुसार अब आगे के पड़ावों पर मां नंदा का स्वागत ससुराल पहुंची बेटी या बहू की तरह स्थानीय रीति-रिवाजों, लोकगीतों और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ किया जाएगा। बुधवार को बधाण की नंदा डोली डुंगरी गांव पहुंची, जहां रात्रि विश्राम हुआ।
कम्यार पहुंची बंड क्षेत्र की नंदा डोली
बंड क्षेत्र की नंदा डोली नौरख, पीपलकोटी, मल्ला अगथल्ला, नंदोली मंदिर, रैतोली और नरगोली गांवों से होकर कम्यार गांव पहुंची। यहां ग्रामीणों ने पारंपरिक ढंग से डोली का स्वागत किया और श्रद्धालुओं ने मां नंदा के दर्शन किए।
वहीं, कुरुड़-दशोली की नंदा डोली सेमा गांव से बैरासकुंड होते हुए मटई-ग्वाड़ पहुंची। डोली के स्वागत और दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
इजरायल के टॉम कर रहे डोली के साथ पैदल यात्रा
नंदा देवी बड़ी जात की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक भव्यता अब विदेशों के लोगों को भी आकर्षित कर रही है। इजरायल से उत्तराखंड पहुंचे टॉम कुरुड़ से दशोली की नंदा डोली के साथ पैदल यात्रा कर रहे हैं। वह एक पड़ाव से दूसरे पड़ाव तक यात्रा में शामिल हो रहे हैं और होमकुंड तक जाने की इच्छा जता चुके हैं।
टॉम ने पहाड़ की लोकसंस्कृति, ग्रामीणों के आतिथ्य, धार्मिक परंपराओं और हिमालय की प्राकृतिक सुंदरता को बेहद खास बताया। उनका कहना है कि इतनी भव्य और जीवंत पैदल धार्मिक यात्रा का अनुभव उनके लिए अविस्मरणीय है।
सोशल मीडिया पर पहुंच रही यात्रा की तस्वीरें
बड़ी जात यात्रा में दिल्ली, पंजाब, मुनस्यारी, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, हल्द्वानी, नैनीताल, रुद्रप्रयाग, टिहरी, पौड़ी और देहरादून समेत कई स्थानों से युवा कंटेंट क्रिएटर और यूट्यूबर भी पहुंच रहे हैं। वे यात्रा के पड़ावों, जागरों, लोकगीतों और परंपराओं को कैमरे में कैद कर सोशल मीडिया के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंचा रहे हैं।
12 वर्ष में आयोजित होने वाली यह यात्रा उत्तराखंड की धार्मिक आस्था के साथ-साथ उसकी समृद्ध लोक-सांस्कृतिक पहचान का भी बड़ा प्रतीक है।
