BRICS Summit 2026: भारत ने दुनिया के सामने रखा नया एजेंडा, व्यापार में डॉलर पर निर्भरता घटाने की तैयारी

BRICS Summit 2026: भारत ने दुनिया के सामने रखा नया एजेंडा, व्यापार में डॉलर पर निर्भरता घटाने की तैयारी

नई दिल्ली। भारत की मेजबानी में हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में वैश्विक व्यापार से लेकर आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार तक बड़े मुद्दे चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। सम्मेलन के पहले दिन भारत ने सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने और व्यापार के लिए स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ भी दुनिया से एकजुट रुख अपनाने की अपील की।

ब्रिक्स के मंच से भारत ने साफ किया कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को आपसी सहयोग का दायरा बढ़ाना होगा।

स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने पर जोर

ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार में डॉलर पर निर्भरता कम करने की दिशा में स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच लेनदेन को आसान बनाना और वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में उभरती अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका मजबूत करना है।

भारत ने सदस्य देशों के बीच व्यापार और निवेश बढ़ाने के साथ आर्थिक सहयोग के नए रास्ते खोलने पर भी जोर दिया।

आतंकवाद पर पीएम मोदी का कड़ा संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स के मंच से आतंकवाद को लेकर भारत का रुख सामने रखा। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोहरे मानदंड नहीं अपनाए जा सकते।

भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई की जरूरत उठाता रहा है। ब्रिक्स सम्मेलन में भी इस मुद्दे को प्रमुखता से सामने रखा गया।

दुनिया से दूरी नहीं, सहयोग बढ़ाना चाहता है BRICS

सम्मेलन में यह संदेश भी सामने आया कि ब्रिक्स का उद्देश्य दुनिया के दूसरे देशों या संगठनों से टकराव पैदा करना नहीं, बल्कि सहयोग के नए अवसर तैयार करना है।

ब्रिक्स में शामिल देश दुनिया की आबादी और अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा हैं। संगठन के विस्तार के बाद वैश्विक मामलों में इसकी भूमिका और प्रभाव दोनों बढ़े हैं। ऐसे में सदस्य देश आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर आपसी तालमेल को और मजबूत करना चाहते हैं।

वैश्विक संस्थाओं में बदलाव की मांग

सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र सहित अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार का मुद्दा भी उठा। भारत लंबे समय से मौजूदा वैश्विक संस्थाओं को वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप बदलने की मांग करता रहा है।

भारत का तर्क है कि दुनिया की अर्थव्यवस्था और राजनीतिक परिस्थितियां बदल चुकी हैं, इसलिए वैश्विक संस्थाओं में विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ को भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

ब्रिक्स के लिए भारत का तीन सूत्री एजेंडा

प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए तीन प्रमुख क्षेत्रों पर जोर दिया। इनमें Resilience, Innovation और Cooperation को भविष्य की साझेदारी के महत्वपूर्ण आधार के रूप में सामने रखा गया।

भारत ने तकनीक और इनोवेशन के इस्तेमाल के साथ सदस्य देशों के बीच लोगों के स्तर पर संपर्क और आर्थिक भागीदारी बढ़ाने की जरूरत भी बताई।

कई वैश्विक नेताओं की मौजूदगी

नई दिल्ली में आयोजित सम्मेलन में कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष और शीर्ष प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इससे पहले ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर राजधानी में व्यापक तैयारियां की गई थीं। सम्मेलन के दौरान औपचारिक बैठकों के साथ विभिन्न देशों के नेताओं के बीच द्विपक्षीय बातचीत भी अहम रहने वाली है।

ब्रिक्स के बढ़ते दायरे के बीच भारत इस मंच का इस्तेमाल ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने के साथ व्यापार, तकनीक, सुरक्षा और वैश्विक प्रशासन से जुड़े मुद्दों को आगे बढ़ाने के लिए कर रहा है।

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