नई दिल्ली। नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को होने जा रहा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन दुनिया की कूटनीति के लिहाज से बेहद अहम होने वाला है। सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत कई बड़े नेता हिस्सा लेंगे। खास बात यह है कि चीनी राष्ट्रपति करीब सात साल बाद भारत आ रहे हैं। वहीं, सम्मेलन से पहले शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के बीच द्विपक्षीय बातचीत प्रस्तावित है।
मोदी और शी जिनपिंग की अलग बैठक भी संभव
ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच अलग से द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना है। दोनों नेताओं की यह मुलाकात ऐसे समय में होने जा रही है, जब पिछले कुछ वर्षों में भारत और चीन के रिश्तों में कई मुद्दों को लेकर तनाव रहा है। ऐसे में दोनों नेताओं की बातचीत पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर रहेगी।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा को दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे पहले वह करीब सात साल पहले भारत आए थे।
पुतिन से आज मिलेंगे प्रधानमंत्री मोदी
ब्रिक्स सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की शुक्रवार सुबह नई दिल्ली में मुलाकात होनी है। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों के साथ वैश्विक परिस्थितियों पर भी बातचीत होने की संभावना है।
अखबार के मुताबिक, मोदी-पुतिन की बैठक में रक्षा सहयोग, ऊर्जा, व्यापार और दूसरे रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। रूसी राष्ट्रपति की यात्रा ऐसे वक्त में हो रही है, जब अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बीच भारत और रूस के संबंध लगातार चर्चा में हैं।
पहली बार एक मंच पर होंगे यूक्रेन और ईरान के शीर्ष नेता
इस बार ब्रिक्स सम्मेलन का दायरा भी खास रहने वाला है। सम्मेलन में रूस और चीन के शीर्ष नेतृत्व के अलावा यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के शामिल होने की बात कही गई है।
इससे सम्मेलन के दौरान वैश्विक संघर्ष, सुरक्षा और बदलती अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की संभावना बढ़ गई है।
दुनिया की करीब आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है BRICS
ब्रिक्स का वैश्विक प्रभाव लगातार बढ़ा है। ब्रिक्स देशों में दुनिया की लगभग 49 प्रतिशत आबादी रहती है। विश्व की कुल जीडीपी में इन देशों की हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत बताई गई है। दुनिया के कुल तेल उत्पादन में ब्रिक्स देशों का हिस्सा करीब 26 प्रतिशत, जबकि वैश्विक निर्यात में हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत बताई गई है।
ब्रिक्स का पहला शिखर सम्मेलन 2009 में रूस में आयोजित हुआ था। 2011 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद समूह का नाम BRICS हुआ। इसके बाद संगठन का विस्तार हुआ और कई नए देश इससे जुड़े।
BRICS Summit 2026 का फोकस
इस बार सम्मेलन का केंद्रीय विषय “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” रखा गया है। सम्मेलन में वैश्विक दक्षिण यानी ग्लोबल साउथ के देशों की प्राथमिकताओं, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार, सतत विकास, तकनीक, सहयोग और बदलती वैश्विक व्यवस्था जैसे मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन की तैयारियों को लेकर वीडियो के जरिए संबंधित अधिकारियों के साथ समीक्षा भी की है। नई दिल्ली में होने वाला यह सम्मेलन भारत के लिए कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
