BRE Summit 2026: स्वच्छ ऊर्जा के तीन बड़े आयोजन पहली बार साथ, नई दिल्ली में जुटेंगी दुनिया भर की कंपनियां

BRE Summit 2026: स्वच्छ ऊर्जा के तीन बड़े आयोजन पहली बार साथ, नई दिल्ली में जुटेंगी दुनिया भर की कंपनियां

नई दिल्ली। भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो 2026 इस बार नवीकरणीय ऊर्जा के साथ सौर ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की भी मेजबानी करेगा। भारत मंडपम में 2 से 5 नवंबर तक होने वाले इस कार्यक्रम में पहली बार BRE समिट एंड एक्सपो, अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की असेंबली और ग्रीन हाइड्रोजन पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन एक साथ आयोजित होंगे।

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बताया कि प्रधानमंत्री ने समिट का उद्घाटन करने की सहमति दे दी है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में नवीकरणीय ऊर्जा की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रधानमंत्री की भागीदारी इस क्षेत्र के प्रति भारत की प्रतिबद्धता और वैश्विक सतत विकास में देश के योगदान को दर्शाती है।

75 से अधिक देशों से भागीदारी की उम्मीद

चार दिवसीय समिट और एक्सपो में 75 से अधिक देशों के 75,000 से ज्यादा प्रतिभागियों के शामिल होने की उम्मीद है। इसमें ऊर्जा परियोजनाएं विकसित करने वाली कंपनियों से लेकर तकनीक, उपकरण निर्माण, भंडारण और वित्तपोषण से जुड़े संस्थान तक भाग लेंगे।

नवीकरणीय ऊर्जा डेवलपर्स, प्रौद्योगिकी कंपनियां, निर्माता, बैटरी स्टोरेज फर्में और ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र की प्रमुख कंपनियां आयोजन का हिस्सा होंगी। इनके अलावा निवेशकों, वित्तीय संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की भागीदारी भी अपेक्षित है।

ISA असेंबली का नौवां सत्र भी होगा आयोजित

BRE समिट एंड एक्सपो के साथ अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन यानी ISA की असेंबली का नौवां सत्र आयोजित किया जाएगा। इसी दौरान ग्रीन हाइड्रोजन पर चौथा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भी होगा। तीनों कार्यक्रमों के एक साथ होने से नवीकरणीय ऊर्जा के अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े प्रतिनिधियों को एक मंच पर संवाद का अवसर मिलेगा।

वैश्विक भागीदारी के लिए भेजे गए निमंत्रण

जोशी के मुताबिक, समिट की रूपरेखा अंतरराष्ट्रीय भागीदारी को ध्यान में रखकर बनाई गई है। BRE समिट एंड एक्सपो के लिए 34 देशों को आमंत्रित किया गया है। वहीं, ISA ने अपनी असेंबली में शामिल होने के लिए 128 देशों को निमंत्रण भेजा है।

आयोजन का उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा की पूरी मूल्य श्रृंखला से जुड़े पक्षों को साथ लाना है, ताकि परियोजना विकास, तकनीक, विनिर्माण, ऊर्जा भंडारण और निवेश से संबंधित विषयों पर व्यापक संवाद हो सके।

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