Uttarakhand NEET UG Scam: कोटे की MBBS सीट के लिए 90 लाख में हुई डील, दो आरोपी गिरफ्तार

Uttarakhand NEET UG Scam: कोटे की MBBS सीट के लिए 90 लाख में हुई डील, दो आरोपी गिरफ्तार

देहरादून। उत्तराखंड में NEET UG 2025 के जरिए MBBS में दाखिले के लिए कथित फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल की जांच अब गिरफ्तारी तक पहुंच गई है। मामले की जांच कर रही SIT ने रूपेश पंडित और अरविंद कुमार को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे से MBBS सीट दिलाने के लिए कथित तौर पर प्रति अभ्यर्थी 45 लाख रुपये का सौदा तय हुआ था। तीन अभ्यर्थियों के परिजनों से 20-20 लाख रुपये एडवांस लिए जाने की बात भी पुलिस जांच में सामने आई है।

दोनों आरोपियों को पूछताछ के लिए देहरादून के रायपुर थाने बुलाया गया था। पुलिस का कहना है कि पूछताछ, दस्तावेजों और अब तक जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर दोनों की भूमिका सामने आने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया।

देहरादून में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल और SIT ने पूरे मामले का खुलासा किया। SIT की जांच अभी जारी है और 12 अन्य संदिग्ध भी जांच के दायरे में हैं।

बेटी के एडमिशन के लिए रूपेश के संपर्क में आया अरविंद

पुलिस जांच के मुताबिक अरविंद कुमार और रूपेश पंडित एक-दूसरे को पिछले दो-तीन साल से जानते थे। अरविंद अपनी बेटी का MBBS में दाखिला कराना चाहता था। इसी सिलसिले में उसने रूपेश से संपर्क किया।

बात आगे बढ़ी तो अरविंद की बेटी के साथ उसके दो परिचितों के बच्चों के MBBS एडमिशन को लेकर भी बातचीत हुई। SIT के अनुसार तीनों अभ्यर्थियों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे से मेडिकल कॉलेज में सीट दिलाने की बात कही गई।

इसके लिए कथित तौर पर एक एडमिशन के 45 लाख रुपये, यानी तीनों एडमिशन के लिए कुल 1.35 करोड़ रुपये की रकम तय हुई। पुलिस के मुताबिक तीनों अभ्यर्थियों की ओर से 20-20 लाख रुपये एडवांस दिए जाने की बात सामने आई है। इस हिसाब से 60 लाख रुपये एडवांस और शेष रकम एडमिशन होने तथा कक्षाएं शुरू होने के बाद देने की बात तय हुई थी।

ऐसे सामने आया फर्जी प्रमाणपत्र का खेल

SIT का आरोप है कि रूपेश पंडित और उसके साथियों ने तीनों अभ्यर्थियों के लिए कूटरचित दस्तावेज तैयार कराए और इनके आधार पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित होने के कथित फर्जी प्रमाणपत्र बनवाए गए।

इन्हीं प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल कर तीनों अभ्यर्थियों ने अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में MBBS में प्रवेश हासिल किया।

मामला सामने आने के बाद SIT ने दाखिले से संबंधित दस्तावेज खंगालने शुरू किए। जांच में अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों में दिए गए पतों पर भी सवाल खड़े हुए। इसके बाद टीम ने संबंधित शिक्षण संस्थानों से रिकॉर्ड कब्जे में लिया और दस्तावेजों के जरिए अभ्यर्थियों के वास्तविक पते तक पहुंची।

हरिद्वार तक पहुंची SIT, खंगाले गए रिकॉर्ड

मामले की तह तक पहुंचने के लिए SIT की 10 सदस्यीय टीम हरिद्वार भी गई। जांच का फोकस केवल दाखिला लेने वाले अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं रखा गया है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि कथित फर्जी दस्तावेज कहां तैयार हुए और सरकारी प्रक्रिया से प्रमाणपत्र जारी होने तक इनमें किस-किस व्यक्ति की भूमिका रही। इसी क्रम में e-District और CSC सेंटरों से जुड़े रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में लिए गए हैं।

पांच साल से एजुकेशन कंसल्टेंसी चला रहा था रूपेश

SIT की जांच में रूपेश पंडित के बारे में भी कई जानकारियां सामने आई हैं। पुलिस के मुताबिक वह अपने साथियों के साथ करीब पांच साल से एजुकेशन कंसल्टेंसी के क्षेत्र में काम कर रहा था।

मेरठ में उसके द्वारा MECODO पाठशाला नाम से कंपनी संचालित किए जाने की जानकारी पुलिस को मिली है। आरोप है कि इसके माध्यम से निजी विश्वविद्यालयों के साथ ही विदेशों में MBBS, BTech, BCA, BBA और BCom समेत विभिन्न पाठ्यक्रमों में कमीशन के आधार पर दाखिले कराने का काम किया जाता था।

पुलिस अब रूपेश के नेटवर्क और उसके पुराने मामलों को भी खंगाल रही है। SIT के मुताबिक भारत के अलावा दूसरे देशों में दाखिलों के लिए भी उसके द्वारा तैयार कराए गए कथित फर्जी प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल से संबंधित जानकारी सामने आई है। इसकी भी जांच की जा रही है।

अब 12 अन्य संदिग्ध SIT के रडार पर

रूपेश पंडित और अरविंद कुमार की गिरफ्तारी इस मामले में SIT की पहली गिरफ्तारी है, लेकिन जांच यहीं खत्म नहीं हुई है। पुलिस के मुताबिक 12 अन्य संदिग्धों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।

जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराने से लेकर सरकारी स्तर पर उन्हें जारी कराने और फिर मेडिकल एडमिशन में इस्तेमाल किए जाने तक पूरा नेटवर्क कैसे काम कर रहा था। e-District और CSC से संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड भी इस कड़ी को जोड़ने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। पुलिस ने संकेत दिया है कि जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

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