देहरादून। हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ यज्ञ को लेकर उत्तराखंड की सियासत आज फिर गरमाने वाली है। कांग्रेस ने इस मामले में सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आवास कूच का ऐलान किया है। प्रदेशभर से कार्यकर्ताओं को देहरादून बुलाया गया है। कार्यक्रम सुबह 10 बजे परेड ग्राउंड से शुरू होने की जानकारी दी गई है।
कांग्रेस इसे केवल एक राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि दलित सम्मान और सामाजिक बराबरी से जुड़ा मुद्दा बता रही है। पार्टी का आरोप है कि रैली स्थल पर हुए शुद्धिकरण के मामले में शिकायतों के बावजूद स्थानीय स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई, जबकि इस विषय पर सवाल उठाने वाले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया गया।
आठ अगस्त की रैली के बाद शुरू हुआ विवाद
विवाद की शुरुआत 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुई कांग्रेस की जनसभा से हुई थी। इस सभा को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने संबोधित किया था। रैली के दो दिन बाद श्रीराम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास संगठन से जुड़े लोगों ने उसी मैदान में यज्ञ कर ‘शुद्धिकरण’ किया।
संगठन से जुड़े लोगों ने उस समय इसे रैली में लगाए गए नारों और खड़गे के पुराने राजनीतिक बयानों के विरोध से जोड़ा था। लेकिन कांग्रेस ने इसे खड़गे की जातीय पहचान से जोड़ते हुए गंभीर आपत्ति जताई। पार्टी का कहना है कि एक दलित नेता की सभा के बाद मैदान का शुद्धिकरण करना भेदभावपूर्ण मानसिकता और छुआछूत की सोच को दर्शाता है।
संसद तक पहुंचा मामला, नड्डा ने दिया था जांच का भरोसा
यह मुद्दा संसद के मानसून सत्र में भी उठा। मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा में इस घटना पर विरोध जताया। उस दौरान सदन में सरकार की ओर से मामले की जांच और उचित कार्रवाई का भरोसा दिया गया था। कांग्रेस का कहना है कि कई दिन बीतने के बाद भी शुद्धिकरण करने वालों के खिलाफ उत्तराखंड में एफआईआर दर्ज नहीं हुई।
खड़गे ने हाल में राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा को पत्र लिखकर भी इस मामले में कार्रवाई न होने पर सवाल उठाए। कांग्रेस का तर्क है कि केवल आश्वासन देने के बजाय जिम्मेदार लोगों पर कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।
राहुल गांधी के बयान पर दर्ज हुआ मुकदमा
राहुल गांधी ने 29 अगस्त को इस मुद्दे को उठाते हुए कथित शुद्धिकरण को छुआछूत से जुड़ा कृत्य बताया और दोषियों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज करने की मांग की थी। इसके बाद हल्द्वानी में एक शिकायत के आधार पर राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि राहुल के बयान से वाल्मीकि समाज की भावनाएं आहत हुई हैं।
कांग्रेस ने इस एफआईआर को राजनीतिक दबाव में उठाया गया कदम बताया है। पार्टी का कहना है कि जिस घटना के खिलाफ शिकायत की गई, उसमें कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन उसके विरोध में आवाज उठाने वाले विपक्षी नेता पर मुकदमा दर्ज कर दिया गया। इसके विरोध में कांग्रेस ने प्रदेश के कई थानों में तहरीरें दीं और राज्यपाल से भी हस्तक्षेप की मांग की।
बेंगलुरु में महेंद्र भट्ट समेत अन्य पर जीरो एफआईआर
इस बीच, 5 सितंबर को बेंगलुरु में उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और अन्य लोगों के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज हुई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि खड़गे की रैली के बाद कथित शुद्धिकरण के जरिए जातिगत भेदभाव को बढ़ावा दिया गया। बेंगलुरु पुलिस ने मामला दर्ज कर उसे क्षेत्राधिकार के आधार पर उत्तराखंड भेजे जाने की बात कही है।
भाजपा का पक्ष है कि कथित शुद्धिकरण का कार्यक्रम पार्टी ने आयोजित नहीं कराया था। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने और चुनावी लाभ के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है।
कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, राष्ट्रीय नेताओं पर नजर
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा है कि पार्टी तब तक संघर्ष जारी रखेगी, जब तक मामले में कार्रवाई नहीं होती। कांग्रेस कार्यकर्ता अलग-अलग जिलों में बैठकों और जनसंपर्क के जरिए आज के कूच के लिए भीड़ जुटाने में लगे रहे।
राहुल गांधी या अन्य राष्ट्रीय नेताओं के कार्यक्रम में शामिल होने की चर्चाएं जरूर रहीं, लेकिन उनकी भागीदारी की औपचारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में आज का सीएम आवास कूच कांग्रेस के लिए इस मुद्दे पर अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने और भाजपा सरकार पर दबाव बढ़ाने का बड़ा अवसर माना जा रहा है।
