बेशक, आज भाजपा के पास अकूत संसाधन हैं। लेकिन उसकी जीत का सिर्फ यही कारण नहीं है। बल्कि वह अपनी हिंदुत्व की राजनीति के पक्ष में इतनी ठोस गोलबंदी कर चुकी है कि चुनावों में उसे परास्त करना अति कठिन हो गया है। चार राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजों का केंद्रीय संदेश यह है […]
कांग्रेस का आत्मघाती कार्ड
कोविड-19 से कितना अलग है चीन का रहस्यमय बाल निमोनिया?
खड़गे क्या यूपी से चुनाव लड़ सकते हैं?
भेदभाव का नायाब नमूना
सिल्क्यारा सुरंग दुर्घटना के सबक
क्योंकि सवाल राजनीतिक है
जो समस्या पैदा हुई है, उसका कारण संविधान की अस्पष्टता नहीं है। अगर केंद्र में सत्ताधारी पार्टी सर्वसत्तावादी महत्त्वाकांक्षाएं पाल ले, तो वे तमाम संवैधानिक प्रावधान महज कागज पर लिखी लकीर बन जाते हैं, जिनका मकसद व्यवस्था को नियंत्रित और संतुलित रखना है। विधेयकों को मंजूरी देने के मामले में राज्यपालों की अपेक्षित भूमिका के […]

