समय के चक्र को पीछे लौटा कर सियासी चमत्कार कर दिखाने की सोच असल में समझ के दिवालियेपन का संकेत देती है। इस प्रयास में कांग्रेस ने सबकी पार्टी होने की अपनी विशिष्ट पहचान को संदिग्ध बना दिया है। चूंकि विचारधारा और जन-गोलबंदी के मोर्चों पर कांग्रेस नेतृत्व दीर्घकालिक रणनीति के जरिए राजनीति की नई […]
कोविड-19 से कितना अलग है चीन का रहस्यमय बाल निमोनिया?
खड़गे क्या यूपी से चुनाव लड़ सकते हैं?
भेदभाव का नायाब नमूना
सिल्क्यारा सुरंग दुर्घटना के सबक
क्योंकि सवाल राजनीतिक है
जो समस्या पैदा हुई है, उसका कारण संविधान की अस्पष्टता नहीं है। अगर केंद्र में सत्ताधारी पार्टी सर्वसत्तावादी महत्त्वाकांक्षाएं पाल ले, तो वे तमाम संवैधानिक प्रावधान महज कागज पर लिखी लकीर बन जाते हैं, जिनका मकसद व्यवस्था को नियंत्रित और संतुलित रखना है। विधेयकों को मंजूरी देने के मामले में राज्यपालों की अपेक्षित भूमिका के […]
