Category: ब्लॉग

कांग्रेस का आत्मघाती कार्ड

समय के चक्र को पीछे लौटा कर सियासी चमत्कार कर दिखाने की सोच असल में समझ के दिवालियेपन का संकेत देती है। इस प्रयास में कांग्रेस ने सबकी पार्टी होने की अपनी विशिष्ट पहचान को संदिग्ध बना दिया है। चूंकि विचारधारा और जन-गोलबंदी के मोर्चों पर कांग्रेस नेतृत्व दीर्घकालिक रणनीति के जरिए राजनीति की नई […]

कोविड-19 से कितना अलग है चीन का रहस्यमय बाल निमोनिया?

रंजीत कुमार करीब चार साल बाद एक बार फिर चीन की किसी बीमारी को लेकर दुनियाभर की स्वास्थ्य मशीनरी चिंतित है। चीन में बड़े पैमाने पर बच्चे सांस की बीमारी से ग्रसित हो रहे हैं। विश्व मीडिया में इसे रहस्यमय बाल निमोनिया कहा जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के अनुरोध पर चीन ने […]

खड़गे क्या यूपी से चुनाव लड़ सकते हैं?

मल्लिकार्जुन खड़गे के जीवन पर आई किताब के विमोचन समारोह के आयोजन के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि मल्लिकार्जुन खड़गे को कांग्रेस उत्तर भारत के किसी राज्य से चुनाव लड़ा  सकती है। वे कर्नाटक के रहने वाले हैं। वे नौ बार लगातार कर्नाटक विधानसभा के सदस्य रहे और उसके बाद 2009 और […]

भेदभाव का नायाब नमूना

नोएडा में लड़कियां अब आठ बजे शाम के बाद क्लास ज्वाइन नहीं कर पा रही हैं। ऐसी रोक लगाते हुए इसे ध्यान में नहीं रखा गया है कि अनगिनत लड़कियां आर्थिक उपार्जन के लिए दिन भर कहीं काम करने के बाद शाम को क्लास ज्वाइन करती हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से लगे उत्तर प्रदेश के […]

सिल्क्यारा सुरंग दुर्घटना के सबक

अजीत द्विवेदी उत्तराखंड के उत्तरकाशी की सिल्क्यारा की निर्माणाधीन सुरंग में हुए दुखद हादसे का अंत सुखद रहा है। सुरंग में फंसे सभी 41 मजदूरों को 17वें दिन सकुशल निकाल लिया गया। लेकिन इस घटना से कुछ सवाल खड़े हुए हैं और कुछ सबक भी मिले हैं, जिन पर सरकारों के साथ साथ इस तरह […]

क्योंकि सवाल राजनीतिक है

जो समस्या पैदा हुई है, उसका कारण संविधान की अस्पष्टता नहीं है। अगर केंद्र में सत्ताधारी पार्टी सर्वसत्तावादी महत्त्वाकांक्षाएं पाल ले, तो वे तमाम संवैधानिक प्रावधान महज कागज पर लिखी लकीर बन जाते हैं, जिनका मकसद व्यवस्था को नियंत्रित और संतुलित रखना है। विधेयकों को मंजूरी देने के मामले में राज्यपालों की अपेक्षित भूमिका के […]

चुनाव मतलब लोगों को मूर्ख बनाना

हरिशंकर व्यास भारत में अब सारे चुनाव आम लोगों को मूर्ख बनाने, उनको बरगलाने, निजी लाभ का लालच देने, उनकी आंखों पर पट्टी बांधने या उनकी आंखों में धूल झोंकने का उपक्रम और मौका है। पार्टियों के घोषणापत्र में भले कुछ भारी-भरकम बातें लिखी जाती हों लेकिन प्रचार में सिर्फ लोक लुभावन घोषणाएं होती हैं, […]

तेलंगाना में फिर जोर लगाया भाजपा ने

भारतीय जनता पार्टी ने तेलंगाना में एक साल पहले बहुत बड़ा राजनीतिक अभियान शुरू किया था। लेकिन फिर उसने अपने कदम पीछे खींच लिए थे। कहा जाने लगा था कि भाजपा को फीडबैक मिली है कि अगर वह बहुत जोर लगा कर लड़ेगी तो उसका फायदा कांग्रेस को होगा। भाजपा नहीं चाहती है कि कांग्रेस […]

लोकसभा चुनाव के लिए मुद्दों की तलाश

अजीत द्विवेदी यह सिर्फ कहने की बात नहीं है कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव देश की राजनीति को दिशा देने वाले होंगे और इनसे पता चलेगा कि अगला लोकसभा चुनाव किन मुद्दों पर लड़ा जाएगा। यह आमतौर पर हर चुनाव के बारे में कहा जाता है लेकिन इस बार पांच राज्यों के चुनाव का […]

भाजपा में कांग्रेसी नेताओं का बढता महत्व

एक समय था, जब भारतीय जनता पार्टी में बाहरी लोगों के लिए कोई जगह नहीं होती थी। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद भाजपा नेताओं की नर्सरी होती थी। वहीं से नेता निकलते थे। अब भी निकलते हैं लेकिन अब भाजपा ने लैटरल एंट्री के दरवाज खुल गए हैं। जिस तरह […]

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