देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति का एक अनुभवी, सादगीपूर्ण और जनप्रिय चेहरा अब हमारे बीच नहीं रहा। पूर्व कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हीरा सिंह बिष्ट का शनिवार देर रात निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। सोमवार को राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित विभिन्न दलों के नेताओं, कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में आम लोगों ने उन्हें अंतिम विदाई दी।
देर रात तबीयत बिगड़ी, अस्पताल पहुंचने से पहले थम गई सांसें
जानकारी के अनुसार, शनिवार देर रात हीरा सिंह बिष्ट की अचानक तबीयत बिगड़ गई। सीने में दर्द की शिकायत के बाद उन्हें तत्काल देहरादून के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक तौर पर उनकी मौत का कारण हृदयाघात माना जा रहा है।
लंबा राजनीतिक सफर, जनता के बीच अलग पहचान
हीरा सिंह बिष्ट उत्तराखंड की राजनीति के उन नेताओं में शामिल रहे, जिन्होंने लंबे समय तक कांग्रेस संगठन और जनहित के मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई। वे तीन बार विधायक चुने गए और अविभाजित उत्तर प्रदेश के अंतिम दौर तथा उत्तराखंड गठन के बाद भी सक्रिय राजनीति का महत्वपूर्ण चेहरा बने रहे।
एनडी तिवारी सरकार में उन्होंने कैबिनेट मंत्री के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई। वह काफी समय तक इंटक के अध्यक्ष भी रहे। अपने शांत स्वभाव, स्पष्टवादिता और आम लोगों से सीधे जुड़ाव के कारण उनकी पहचान दलगत राजनीति से ऊपर एक जननेता के रूप में रही।
आवास पर उमड़ा श्रद्धांजलि देने वालों का जनसैलाब
उनके निधन की सूचना मिलते ही देहरादून स्थित उनके आवास पर सुबह से ही लोगों का पहुंचना शुरू हो गया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं के अलावा भाजपा सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में समर्थकों ने उनके पार्थिव शरीर के दर्शन कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी उनके आवास पहुंचकर पुष्पचक्र अर्पित किया और शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हीरा सिंह बिष्ट का सार्वजनिक जीवन जनसेवा और सादगी का उदाहरण रहा है।
राजकीय सम्मान के साथ हुई अंतिम विदाई
श्रद्धांजलि के बाद उनकी अंतिम यात्रा देहरादून से नालापानी श्मशान घाट के लिए रवाना हुई। पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम यात्रा में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, प्रशासनिक अधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में नागरिकों ने भाग लिया। पूरे वातावरण में शोक और सम्मान का भाव दिखाई दिया।
राजनीतिक सीमाओं से ऊपर था उनका व्यक्तित्व
हीरा सिंह बिष्ट उन नेताओं में गिने जाते थे, जिनके सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से मधुर संबंध थे। राजनीतिक मतभेदों के बावजूद उनके व्यवहार और सादगी की अक्सर सराहना होती रही। यही कारण रहा कि उनके निधन पर सत्ता और विपक्ष दोनों के नेताओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
जनसेवा के लिए हमेशा याद किए जाएंगे
दशकों तक सक्रिय सार्वजनिक जीवन जीने वाले हीरा सिंह बिष्ट ने उत्तराखंड की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। जनता से उनका सीधा संवाद, संगठन के प्रति प्रतिबद्धता और विकास के मुद्दों पर उनकी सक्रियता उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाती थी।
उनके निधन के साथ उत्तराखंड की राजनीति का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया है। राज्य ने एक ऐसे वरिष्ठ जनप्रतिनिधि को खो दिया है, जिनकी सादगी, सहजता और जनसेवा की भावना लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों में बनी रहेगी।
