नई दिल्ली। उत्तर भारत की महत्वाकांक्षी किसाऊ बहुउद्देश्यीय बांध परियोजना को लेकर लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता अब समाप्त होती नजर आ रही है। केंद्र सरकार की पहल पर संबंधित राज्यों के बीच महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनने के बाद परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। माना जा रहा है कि इस फैसले से एक दशक से अधिक समय से रुकी प्रक्रिया को नई गति मिलेगी।
दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य परियोजना से जुड़े लंबित मामलों का समाधान निकालना और निर्माण कार्य की दिशा में आगे बढ़ना था। चर्चा के दौरान सभी पक्षों ने परियोजना के व्यापक लाभों को देखते हुए सहयोगात्मक रुख अपनाने पर सहमति जताई।
जल, बिजली और सिंचाई का बड़ा स्रोत बनेगा बांध
किसाऊ बांध टोंस नदी पर प्रस्तावित है, जो यमुना की प्रमुख सहायक नदी मानी जाती है। इस परियोजना का उद्देश्य केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से जल संरक्षण, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार और पेयजल उपलब्धता को भी मजबूत बनाया जाना है।
परियोजना के पूर्ण होने पर करीब 660 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन होने का अनुमान है। इसके अलावा बड़ी मात्रा में जल संग्रहण क्षमता विकसित होगी, जिससे कई राज्यों की पेयजल और कृषि संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
छह राज्यों को मिलेगा प्रत्यक्ष लाभ
विशेषज्ञों के अनुसार यह परियोजना उत्तर भारत के जल संसाधन प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश को इससे विभिन्न स्तरों पर लाभ मिलने की उम्मीद है। किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा मिलेगी, जबकि शहरी क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति को भी मजबूती मिलेगी। बढ़ती आबादी और भविष्य में संभावित जल संकट को देखते हुए इस परियोजना को रणनीतिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आखिरकार वित्तीय मुद्दों पर बनी सहमति
पिछले कई वर्षों से परियोजना की प्रगति लागत और हिस्सेदारी से जुड़े प्रश्नों के कारण प्रभावित रही थी। विभिन्न राज्यों के बीच वित्तीय जिम्मेदारियों को लेकर मतभेद होने से निर्माण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही थी। हालिया बातचीत में इन विषयों पर सकारात्मक समाधान निकलने से परियोजना को नई दिशा मिली है। सरकारी स्तर पर अब यह प्रयास किया जा रहा है कि सभी आवश्यक औपचारिकताएं जल्द पूरी कर निर्माण कार्य शुरू किया जाए।
क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
किसाऊ बांध परियोजना केवल जल और ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं है। इसके निर्माण से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, आधारभूत ढांचे का विकास होगा और कृषि उत्पादन में सुधार की संभावना भी बढ़ेगी। इसके साथ ही जल संसाधनों के बेहतर उपयोग से क्षेत्रीय विकास को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
केंद्र के दखल से अब आसान होगी राह
राज्यों के बीच बनी सहमति को परियोजना के लिए निर्णायक कदम माना जा रहा है। अब तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा करने पर जोर दिया जाएगा। यदि सभी चरण निर्धारित समय में पूरे होते हैं, तो उत्तर भारत की सबसे महत्वपूर्ण जल एवं ऊर्जा परियोजनाओं में शामिल किसाऊ बांध जल्द निर्माण के चरण में प्रवेश कर सकता है। कुल मिलाकर, किसाऊ बांध परियोजना को मिली यह नई गति उत्तर भारत की जल सुरक्षा, सिंचाई व्यवस्था और ऊर्जा उत्पादन के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
