मुन्दोली (चमोली)। हिमालय की संवेदनशील प्रकृति और उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को बचाने का संदेश लेकर अंतरराष्ट्रीय अल्ट्रा ट्रेल धावक कलम सिंह बिष्ट 18 सितंबर को 60 किलोमीटर की चुनौतीपूर्ण दौड़ पूरी करेंगे। ‘रन फॉर सेफ कल्चर एंड हिमालय’ अभियान के तहत वह मुन्दोली से बेदनी बुग्याल पहुंचेंगे और फिर दौड़ते हुए वापस मुन्दोली लौटेंगे।
यह दौड़ समुद्र तल से करीब 7,300 फीट की ऊंचाई पर बसे मुन्दोली गांव से शुरू होगी। इसके बाद कलम सिंह बिष्ट लगभग 14,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित बेदनी बुग्याल तक जाएंगे। वहां से वापस मुन्दोली पहुंचने के साथ उनकी 60 किलोमीटर की दौड़ पूरी होगी।
कठिन पहाड़ी रास्तों से होकर गुजरेंगे कलम सिंह
मुन्दोली से बेदनी बुग्याल तक का रास्ता ऊंचाई, मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है। इस कठिन मार्ग पर दौड़ लगाने का उद्देश्य लोगों का ध्यान हिमालयी क्षेत्रों के पर्यावरण और यहां की पारंपरिक संस्कृति के संरक्षण की ओर आकर्षित करना है।
कलम सिंह बिष्ट पूर्व सैन्यकर्मी और अंतरराष्ट्रीय अल्ट्रा ट्रेल धावक हैं। उन्हें सेना प्रमुख प्रशस्ति और जीओसी-इन-सी पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। समाजसेवा के क्षेत्र में उन्हें राज्यपाल पुरस्कार भी मिला है। वह अनंत नंदा फाउंडेशन के संस्थापक एवं निदेशक हैं।
बुग्यालों और जलस्रोतों को बचाने की अपील
इस अभियान के दौरान कलम सिंह स्थानीय ग्रामीणों, युवाओं और मां नंदा देवी यात्रा से जुड़े श्रद्धालुओं से हिमालय को स्वच्छ एवं सुरक्षित रखने की अपील करेंगे। उनका संदेश है कि पर्वतीय क्षेत्रों में प्लास्टिक और कूड़ा-कचरा न फैलाया जाए। इसके साथ ही बुग्यालों, जंगलों और प्राकृतिक जलस्रोतों को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों से बचना भी जरूरी है।
उनका कहना है कि हिमालय केवल एक प्राकृतिक संरचना नहीं, बल्कि उत्तराखंड की संस्कृति, परंपराओं, आस्था और स्थानीय जीवन का आधार है। इसलिए पर्यावरण की रक्षा के साथ स्थानीय रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक मान्यताओं का सम्मान करना भी प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है।
युवाओं को प्रकृति और अपनी जड़ों से जोड़ने का प्रयास
‘रन फॉर सेफ कल्चर एंड हिमालय’ के माध्यम से युवाओं को पर्यावरण संरक्षण, स्वस्थ जीवनशैली और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा। अभियान का उद्देश्य युवाओं को यह समझाना है कि हिमालय की सुरक्षा केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए स्थानीय समुदायों, यात्रियों और नई पीढ़ी की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है।
कलम सिंह बिष्ट ने लोगों से “हिमालय को सुरक्षित रखें, संस्कृति और परंपराओं को सुरक्षित रखें” के संकल्प से जुड़ने का आह्वान किया है। उनकी यह दौड़ हिमालय की रक्षा के साथ ही उत्तराखंड की प्राकृतिक और सांस्कृतिक पहचान को बचाने का संदेश देगी।
