देहरादून। अग्निपथ योजना को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने योजना को युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा कि चार साल की सेवा के बाद बड़ी संख्या में युवाओं के सामने दोबारा रोजगार तलाशने की चुनौती खड़ी होगी। कांग्रेस ने केंद्र सरकार से अग्निवीरों की सेवा के बाद रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और पुनर्वास को लेकर स्पष्ट रोडमैप सार्वजनिक करने की मांग की है।
कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित संयुक्त पत्रकार वार्ता में प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के साथ चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह और चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत ने अग्निवीर योजना को लेकर पार्टी का पक्ष रखा। पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला, महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला, प्रदेश प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह समेत अन्य नेता भी मौजूद रहे।
मोदी के जन्मदिन के कार्यक्रमों पर भी गोदियाल ने उठाए सवाल
गणेश गोदियाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर आयोजित दीपोत्सव कार्यक्रमों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि महंगाई और रोजगार जैसी चुनौतियों के बीच राजनीतिक नेताओं में दीप जलाकर प्रधानमंत्री के प्रति समर्थन प्रदर्शित करने की होड़ दिखाई दे रही है। उनका कहना था कि यदि आम लोग सरकार के काम से खुश होकर स्वेच्छा से इस तरह के आयोजन करें तो उसका अर्थ अलग होगा।
इसके बाद गोदियाल ने अग्निवीर योजना का मुद्दा उठाते हुए कहा कि देश के लाखों युवा सेना में स्थायी सेवा की उम्मीद के साथ वर्षों तक तैयारी करते हैं, लेकिन नई व्यवस्था में अधिकांश अग्निवीरों का सैन्य कार्यकाल चार वर्ष बाद समाप्त हो जाता है।
कांग्रेस ने पूछा- चार साल बाद बाकी युवाओं का क्या होगा?
गोदियाल ने कहा कि यदि कोई युवा 17-18 वर्ष की उम्र में सेना में जाता है और चार साल बाद बाहर आता है तो उसे 21-22 वर्ष की उम्र में फिर रोजगार की तलाश करनी होगी। कांग्रेस का सवाल है कि ऐसे युवाओं के लिए दीर्घकालिक रोजगार और सामाजिक सुरक्षा की क्या व्यवस्था होगी।
उन्होंने नियमित सैनिक और अग्निवीर की सेवा शर्तों में अंतर का मुद्दा भी उठाया। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जब दोनों ही देश की सुरक्षा से जुड़े दायित्व निभाते हैं तो सेवा अवधि, पेंशन और दीर्घकालिक सामाजिक सुरक्षा जैसे विषयों पर सरकार को युवाओं की चिंताओं का जवाब देना चाहिए।
उत्तराखंड के युवाओं पर विशेष असर का दावा
प्रीतम सिंह ने कहा कि उत्तराखंड की सैन्य परंपरा पुरानी रही है और प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में बड़ी संख्या में परिवार सेना को रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से जोड़कर देखते हैं। उन्होंने कहा कि इसी वजह से अग्निवीर व्यवस्था का उत्तराखंड के युवाओं और सैन्य परिवारों पर प्रभाव महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि युवाओं की मांग स्थायी रोजगार की है। चार साल की सैन्य सेवा पूरी करने के बाद उन्हें फिर रोजगार की प्रतिस्पर्धा में उतरना पड़ सकता है। कांग्रेस ने सरकार से पूछा कि नियमित सेवा में चयनित नहीं होने वाले अग्निवीरों के लिए स्थायी रोजगार की कितनी संभावनाएं सुनिश्चित की गई हैं।
हरक सिंह रावत ने मांगे वास्तविक नियुक्तियों के आंकड़े
डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि विभिन्न विभागों में आरक्षण या प्राथमिकता की घोषणा पर्याप्त नहीं है। सरकार को यह भी सार्वजनिक करना चाहिए कि सेवा से बाहर आने वाले अग्निवीरों में से वास्तव में कितने युवाओं को स्थायी रोजगार मिलता है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में सेना और सैन्य परिवारों का विशेष महत्व है। ऐसे में भर्ती नीति बनाते समय युवाओं के भविष्य और सैन्य बलों की आवश्यकताओं दोनों पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने सेना की नियमित भर्ती प्रक्रिया मजबूत करने और रिक्त पदों को समयबद्ध तरीके से भरने की मांग भी की।
कांग्रेस ने मांगा अग्निवीरों के लिए विशेष पुनर्वास पैकेज
कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि चार साल की सेवा पूरी करने वाले युवाओं के लिए उच्च शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण, सरकारी नौकरियों, स्वरोजगार और बैंक ऋण से जुड़ी व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाए। पार्टी ने उत्तराखंड जैसे सैन्य बहुल राज्य के लिए विशेष पुनर्वास नीति की भी मांग उठाई।
सैनिक विभाग के अध्यक्ष कर्नल राम रतन नेगी ने भर्ती के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि पहले सेना में सालाना करीब 80 हजार युवाओं को रोजगार मिलता था, जबकि अब यह संख्या करीब 47 हजार रह गई है और इनमें भी नियमित सेवा में जाने वालों की संख्या काफी कम होगी।
अग्निवीर योजना की समीक्षा की मांग
कांग्रेस ने केंद्र से पूछा कि क्या सरकार अग्निवीर योजना की स्वतंत्र समीक्षा कराने और अग्निवीरों के लिए दीर्घकालिक सेवा एवं सामाजिक सुरक्षा के विकल्पों पर विचार करने को तैयार है। पार्टी नेताओं ने कहा कि उनका विरोध सेना से नहीं बल्कि मौजूदा भर्ती व्यवस्था से है और वे युवाओं के रोजगार तथा सैनिकों से जुड़े मुद्दे उठाते रहेंगे।
