नई दिल्ली। देश की राजधानी में आयोजित “हिमालय है तो हम हैं” गोष्ठी उस समय तीखी बहस का केंद्र बन गई, जब वरिष्ठ पर्यावरण कार्यकर्ता भोपाल सिंह चौधरी ने मंच से पर्यावरण संरक्षण के नाम पर चल रही दिखावटी कोशिशों को खुलकर चुनौती दी। भाजपा और कांग्रेस के नेताओं, पूर्व केंद्रीय मंत्रियों, पर्यावरण विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से भरे सभागार में चौधरी के शब्दों ने सबको असहज कर दिया।
उन्होंने कहा कि बीते दो दशकों में गंगा संरक्षण का अभियान सिर्फ गोष्ठियों, सम्मेलनों और औपचारिक घोषणाओं तक सीमित रह गया है। चौधरी के मुताबिक, “20 साल से न गंगा अविरल हुई, न निर्मल। गंगा के लिए तप करने वाले प्रो. जी.डी. अग्रवाल और संत निगमानंद ने अपनी जान दे दी, लेकिन सरकारों ने उनके संदेश तक को सम्मान नहीं दिया। उनके अंतिम संस्कार में भी बाधाएँ खड़ी की गईं और हमें जेल भेज दिया गया।”
चौधरी ने नेताओं की कथनी और करनी पर भी सवाल उठाए। धारी देवी के मुद्दे को याद करते हुए उन्होंने कहा कि देवी को बचाने के आंदोलन में कई बड़े नेता और संत भाषण देने जरूर आए, लेकिन निर्णायक वक्त पर सब गायब हो गए। उन्होंने बताया, “जिस दिन धारी देवी को डुबोया गया, हम सबको फोन कर रहे थे, हर नंबर बंद मिला। और उसी के बाद पूरे प्रदेश में केदारनाथ जैसी भयानक आपदा आई, जिसे लोग आज भी भूल नहीं पाए।”
गोष्ठी में उन्होंने उत्तरकाशी के संदर्भ में गंभीर चेतावनी भी दी। उनके अनुसार, विकास परियोजनाओं के नाम पर बड़ी संख्या में हरे-भरे पेड़ों की कटाई की तैयारी की जा रही है, जो हिमालय के पारिस्थितिक संतुलन को गहरा नुकसान पहुंचा सकती है। चौधरी का कहना था कि अब सिर्फ चर्चाओं से पर्यावरण नहीं बचेगा। “अगर सच में पर्यावरण की चिंता है, तो मंचों से घोषणाएँ करने के बजाय जमीन पर आएं। उत्तरकाशी के पेड़ों को बचाने के लिए साथ खड़े हों, तभी आपके शब्दों में दम माना जाएगा।” उनके इस सख्त और स्पष्ट वक्तव्य ने पूरी सभा को झकझोर दिया और हिमालयी पर्यावरण पर चल रही बहस को नई दिशा दे दी।
कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी, डॉ. करण सिंह, मल्लिका भनोट, पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा, किशोर उपाध्याय, जसपाल चौहान, पूर्व आईएएस चंद्र कुमार शर्मा, विधायक विशन सिंह चुफाल, हेमंत ध्यानी, वरिष्ठ पत्रकार सुशील बहुगुणा, कर्नल कोठियाल सहित विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ और पर्यावरण चिंतक उपस्थित रहे।
