Ranji Trophy 2025-26: उत्तराखंड की ऐतिहासिक छलांग, झारखंड को पारी से हराकर पहली बार सेमीफाइनल में जगह

Ranji Trophy 2025-26: उत्तराखंड की ऐतिहासिक छलांग, झारखंड को पारी से हराकर पहली बार सेमीफाइनल में जगह

देहरादून/जमशेदपुर। उत्तराखंड क्रिकेट टीम ने रणजी ट्रॉफी 2025-26 में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए पहली बार सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया है। जमशेदपुर के कीनन स्टेडियम में खेले गए क्वार्टर फाइनल मुकाबले में उत्तराखंड ने झारखंड को पारी और छह रनों से मात देकर घरेलू क्रिकेट में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। मुकाबला तीसरे दिन ही समाप्त हो गया, जिससे उत्तराखंड की एकतरफा श्रेष्ठता साफ नजर आई।

मैच में झारखंड की टीम पहली पारी में 235 रनों पर सिमट गई। इसके जवाब में उत्तराखंड ने सधी हुई बल्लेबाजी करते हुए 371 रन बनाए और 136 रनों की बढ़त हासिल की। ओपनर अवनीश सुधा ने 64 रन बनाकर टीम को अच्छी शुरुआत दिलाई, जबकि कप्तान कुणाल चंदेल ने 68 रनों की अहम पारी खेली। मध्यक्रम में जगदीश सुचित ने लंबा समय क्रीज पर टिकते हुए 172 गेंदों में 70 रन बनाए और पारी को मजबूती दी। निचले क्रम में अभय नेगी के 46 रन और विकेटकीपर सौरव रावत के 32 रन भी उपयोगी साबित हुए।

पहली पारी में बड़ा अंतर होने के बाद झारखंड की दूसरी पारी उत्तराखंड के गेंदबाजों के सामने पूरी तरह ढह गई। झारखंड की टीम सिर्फ 130 रन ही बना सकी और उसके अंतिम आठ विकेट महज 30 रनों के भीतर गिर गए। इसके साथ ही उत्तराखंड ने पारी और छह रनों से मुकाबला अपने नाम कर लिया।

गेंदबाजी में मयंक मिश्रा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 22 रन देकर पांच विकेट झटके और उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच घोषित किया गया। तेज गेंदबाज अभय नेगी ने भी प्रभावी गेंदबाजी करते हुए 36 रन देकर चार विकेट हासिल किए। दोनों गेंदबाजों की सटीक लाइन-लेंथ के सामने झारखंड के बल्लेबाज टिक नहीं सके।

रणजी ट्रॉफी के सेमीफाइनल तक पहुंचना उत्तराखंड जैसे अपेक्षाकृत नए और सीमित संसाधनों वाले राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। टीम की योजनाबद्ध तैयारी, अनुशासन और सामूहिक प्रदर्शन ने इस सफलता को संभव बनाया है।

राज्य में क्रिकेट के ढांचागत विकास को लेकर क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के पूर्व सचिव महिम वर्मा के कार्यकाल में किए गए प्रयासों को भी इस उपलब्धि से जोड़कर देखा जा रहा है। उनके समय में इंफ्रास्ट्रक्चर, खिलाड़ी विकास और कोचिंग व्यवस्था पर दिया गया जोर अब परिणाम के रूप में सामने आ रहा है।

सेमीफाइनल में पहुंचकर उत्तराखंड ने यह संकेत दे दिया है कि वह भारतीय घरेलू क्रिकेट में लंबे समय तक प्रतिस्पर्धी टीम के रूप में बने रहने की क्षमता रखता है।

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