देश को मिला नया चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, ले.ज. (सेनि) एनएस राजा सुब्रमणि बने तीसरे सीडीएस

देश को मिला नया चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, ले.ज. (सेनि) एनएस राजा सुब्रमणि बने तीसरे सीडीएस

नई दिल्ली। भारत सरकार ने सशस्त्र बलों के सर्वोच्च सैन्य ढांचे में अहम फेरबदल करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) एनएस राजा सुब्रमणि को देश का नया चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) नियुक्त किया है। उनके साथ ही वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन को भारतीय नौसेना का अगला प्रमुख बनाए जाने की घोषणा की गई है। इन नियुक्तियों को भारतीय सेना के संयुक्त संचालन और भविष्य की रक्षा रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

एनएस राजा सुब्रमणि लंबे समय तक भारतीय सेना में विभिन्न अहम जिम्मेदारियों पर कार्य कर चुके हैं। वे सेना के वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ भी रह चुके हैं और फिलहाल राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार की भूमिका निभा रहे थे। रक्षा मामलों के जानकार उन्हें सामरिक योजनाओं और सीमा सुरक्षा से जुड़े विषयों का अनुभवी अधिकारी मानते हैं।

गढ़वाल राइफल्स की आठवीं बटालियन से कमीशन प्राप्त करने वाले राजा सुब्रमणि ने अपने सैन्य करियर में कई महत्वपूर्ण कमानों का नेतृत्व किया। उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर उनकी भूमिका को विशेष रूप से उल्लेखनीय माना जाता है। सेना में उनके लंबे अनुभव को देखते हुए सरकार ने उन्हें देश की तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी है।

सरकारी आदेश के अनुसार, वे मौजूदा CDS जनरल अनिल चौहान के स्थान पर पदभार ग्रहण करेंगे। इसके साथ ही वे रक्षा मंत्रालय के सैन्य मामलों के विभाग के सचिव की जिम्मेदारी भी संभालेंगे। माना जा रहा है कि उनके कार्यकाल में संयुक्त थिएटर कमांड और सैन्य आधुनिकीकरण से जुड़े कई अहम फैसलों को आगे बढ़ाया जा सकता है।

इसी क्रम में वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन को भारतीय नौसेना का नया प्रमुख नियुक्त किया गया है। वे वर्तमान में पश्चिमी नौसेना कमान की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और जल्द ही एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी का स्थान लेंगे। नौसेना में उनके अनुभव को हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक मजबूती के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, बदलते वैश्विक हालात और आधुनिक युद्ध तकनीकों के दौर में सेना के शीर्ष नेतृत्व में यह बदलाव काफी अहम है। आने वाले समय में नई सैन्य रणनीति, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और तीनों सेनाओं के संयुक्त संचालन पर विशेष जोर देखने को मिल सकता है।

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