देहरादून/पौड़ी। पौड़ी में मुख्य विकास अधिकारी (CDO) गिरीश गुणवंत और जिला विकास अधिकारी (DDO) मनविंदर कौर के अचानक हुए तबादलों ने जिले की राजनीति, प्रशासन और सोशल मीडिया में नई बहस छेड़ दी है। शासन भले ही इसे नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया बता रहा हो, लेकिन स्थानीय स्तर पर लोग इसे सामान्य तबादले की तरह नहीं देख रहे। खासकर गिरीश गुणवंत के ट्रांसफर को लेकर लोगों के बीच नाराजगी और सवाल दोनों दिखाई दे रहे हैं।
पौड़ी में पिछले कुछ महीनों से विकास कार्यों, भुगतान फाइलों और योजनाओं की स्वीकृतियों को लेकर अंदरखाने तनातनी की चर्चाएं लगातार चल रही थीं। सोशल मीडिया पर वायरल पोस्टों और स्थानीय चर्चाओं में दावा किया जा रहा है कि कुछ मामलों में भुगतान प्रक्रिया को लेकर अधिकारियों ने सख्त रुख अपनाया था। चर्चाओं के केंद्र में विधायक निधि से जुड़ी पानी की टंकियों के भुगतान का मुद्दा भी बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि अधूरी औपचारिकताओं और दस्तावेजों के आधार पर भुगतान करने को लेकर दोनों अधिकारियों ने आपत्ति जताई थी। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है।
यही वजह है कि तबादले के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ सी आ गई। कई लोगों ने इसे “सख्ती की कीमत” और “ईमानदारी की सजा” तक करार दिया। स्थानीय फेसबुक पेजों और व्हाट्सएप समूहों में लगातार यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या नियमों के अनुसार काम करने वाले अधिकारियों को अचानक हटाया जाना महज संयोग है।
गिरीश गुणवंत की पहचान जिले में एक सक्रिय और सख्त अधिकारी के रूप में रही है। उन्होंने कई बैठकों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को खुलकर चेतावनी दी थी। मनरेगा, अमृत सरोवर, ग्रामीण विकास और स्वच्छता योजनाओं की मॉनिटरिंग को लेकर उनकी कार्यशैली लगातार चर्चा में रही। फील्ड विजिट और योजनाओं की समीक्षा में उनकी सख्ती को प्रशासनिक हलकों में गंभीरता से देखा जाता था।
इन तबादलों को लेकर सवाल इसलिए भी ज्यादा उठ रहे हैं क्योंकि आमतौर पर बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल के दौरान कई अधिकारियों के तबादले एक साथ होते हैं। लेकिन इस मामले में सीमित स्तर पर हुए बदलाव ने लोगों के बीच अलग तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है। राजनीतिक हलकों में भी यह चर्चा है कि क्या विकास कार्यों और भुगतान प्रक्रियाओं को लेकर बढ़ा दबाव इन तबादलों की वजह बना।
हालांकि शासन स्तर पर किसी भी तरह के विवाद, दबाव या असहमति की बात से साफ इनकार किया गया है। सरकारी आदेश में इसे सामान्य प्रशासनिक फेरबदल बताया गया है। नए आदेश के तहत अशोक जोशी को पौड़ी का नया सीडीओ बनाया गया है, जबकि गिरीश गुणवंत को संभागीय खाद्य आयुक्त (RFC) गढ़वाल की जिम्मेदारी दी गई है। बावजूद इसके, पौड़ी में यह मामला फिलहाल प्रशासनिक निर्णय से ज्यादा जनचर्चा और राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है।
