UTTARAKHAND CABINET DECISION: कई प्रस्तावों पर लगी मोहर, नीतिगत बदलावों को मिली मंजूरी

UTTARAKHAND CABINET DECISION: कई प्रस्तावों पर लगी मोहर, नीतिगत बदलावों को मिली मंजूरी

देहरादून।  उत्तराखंड कैबिनेट की गुरूवार को राजधानी देहरादून में हुई बैठक में सरकार ने कई ऐसे फैसले लिए हैं, जिनका असर सीधे आम लोगों, युवाओं और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में 18 प्रस्तावों पर विचार हुआ और कई अहम नीतिगत बदलावों को मंजूरी दी गई। बैठक के बाद सचिव मुख्यमंत्री शैलेश बगोली ने फैसलों की जानकारी दी।

सरकार ने वन विभाग में भर्ती प्रक्रिया को अधिक पेशेवर बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। वन दरोगा पद के लिए अब स्नातक योग्यता अनिवार्य कर दी गई है, जबकि आयु सीमा 21 से 35 वर्ष तय की गई है। वहीं वन आरक्षी के लिए अधिकतम आयु सीमा बढ़ाकर 25 वर्ष कर दी गई है। इसे युवाओं के लिए अवसर विस्तार और विभागीय दक्षता बढ़ाने की पहल माना जा रहा है।

परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार ने बसों का बेड़ा बढ़ाने का निर्णय लिया है। अब राज्य में 250 नई बसें खरीदी जाएंगी। जीएसटी दर में कमी के बाद सरकार ने पहले से स्वीकृत बसों की संख्या में इजाफा किया है, जिससे खासतौर पर दूरस्थ क्षेत्रों में आवागमन बेहतर होने की उम्मीद है।

कुंभ मेला से जुड़े विकास कार्यों को तेजी देने के लिए स्वीकृति प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। अब छोटी परियोजनाएं स्थानीय स्तर पर ही मंजूर हो सकेंगी, जबकि बड़ी परियोजनाओं के लिए उच्च स्तर की स्वीकृति जरूरी होगी। इसके साथ ही मोटरयान नियमों में बदलाव करते हुए प्रवर्तन अधिकारियों के लिए वर्दी अनिवार्य कर दी गई है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।

शिक्षा के क्षेत्र में मदरसों की मान्यता व्यवस्था को पुनर्गठित किया गया है। अब कक्षा 1 से 8 तक के मदरसों को जिला स्तर से मान्यता मिलेगी, जबकि उच्च कक्षाओं के लिए राज्य स्तर की मंजूरी आवश्यक होगी। सरकार इस व्यवस्था को कानूनी रूप देने के लिए जल्द अध्यादेश लाने की तैयारी में है।

कार्मिक विभाग में प्रतीक्षा सूची को लेकर नई स्पष्टता लाई गई है। यदि एक वर्ष के भीतर नियुक्ति नहीं होती है, तो प्रतीक्षा सूची स्वतः निरस्त मानी जाएगी। साथ ही विशेष शिक्षा शिक्षकों की योग्यता तय करने के लिए नई नियमावली को भी मंजूरी दी गई है।

लोक निर्माण विभाग में जूनियर इंजीनियर भर्ती और दिव्यांग वर्ग के पदों को लेकर फैसले लिए गए हैं। खाली पदों को भरने और नए पद सृजन की स्वीकृति दी गई है। ठेकेदारी व्यवस्था में भी बदलाव करते हुए डी श्रेणी के ठेकेदारों को अब अधिक मूल्य के कार्य दिए जा सकेंगे।

उच्च शिक्षा में शोध को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना का विस्तार 21 अशासकीय महाविद्यालयों तक किया गया है। इससे प्रदेश में शोध गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

वन क्षेत्रों में आजीविका बढ़ाने के लिए मधुमक्खी पालन आधारित नीति को मंजूरी दी गई है। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय समुदायों की आय बढ़ाने के साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना है।

इसके अलावा, सरकार ने उप खनिज से जुड़ी नियमावली में संशोधन करते हुए रॉयल्टी दर में बढ़ोतरी की है, जिससे राज्य के राजस्व में इजाफा होने की संभावना है।

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