उत्तराखंड में रेलवे की रफ्तार में इजाफा: तीन साल में 18 नई ट्रेनें, 40 हजार करोड़ से ज्यादा की परियोजनाएं

उत्तराखंड में रेलवे की रफ्तार में इजाफा: तीन साल में 18 नई ट्रेनें, 40 हजार करोड़ से ज्यादा की परियोजनाएं

देहरादून। उत्तराखंड में रेलवे विकास को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा अपडेट दिया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में जानकारी देते हुए बताया कि राज्य में रेलवे अवसंरचना, सुरक्षा और नई परियोजनाओं पर खर्च में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। यह जानकारी उन्होंने हरिद्वार सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत और नैनीताल सांसद अजय भट्ट के सवालों के जवाब में दी।

रेल मंत्री के अनुसार, उत्तराखंड में रेलवे बजट में पिछले एक दशक में जबरदस्त उछाल आया है। वर्ष 2009-14 के दौरान जहां औसतन 187 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष खर्च होते थे, वहीं वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर करीब 4,641 करोड़ रुपये पहुंच गया है। यह करीब 25 गुना वृद्धि है, जो राज्य में रेलवे के तेजी से विस्तार को दर्शाती है।

राज्य में फिलहाल 40,384 करोड़ रुपये की लागत से कुल 216 किलोमीटर लंबाई की तीन नई रेल लाइनों को स्वीकृति मिल चुकी है। इनमें से 16 किलोमीटर रेल लाइन चालू भी हो चुकी है, जबकि मार्च 2025 तक लगभग 19,898 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। देवबंद-रुड़की रेल लाइन (27 किमी) का काम पूरा हो गया है, जिससे दिल्ली और देहरादून के बीच की दूरी करीब 40 किलोमीटर कम हो जाएगी।

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना को उत्तराखंड के लिए गेमचेंजर माना जा रहा है। 125 किलोमीटर लंबी यह लाइन देहरादून, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों को जोड़ते हुए देवप्रयाग और कर्णप्रयाग जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों को सीधे रेल नेटवर्क से जोड़ेगी। इस परियोजना में 104 किलोमीटर लंबी 16 मुख्य सुरंगें और करीब 98 किलोमीटर लंबी 12 बचाव सुरंगें बनाई जा रही हैं। इनमें से अधिकांश सुरंगों का निर्माण पूरा हो चुका है या अंतिम चरण में है। साथ ही 19 बड़े पुलों में से 8 तैयार हो चुके हैं और बाकी पर काम जारी है।

रेल मंत्रालय के मुताबिक, वर्ष 2022-23 से 2025-26 के बीच उत्तराखंड में 441 किलोमीटर के सात सर्वेक्षण स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें तीन नई रेल लाइनें और चार दोहरीकरण परियोजनाएं शामिल हैं। सुरक्षा के लिहाज से समपारों की जगह ओवरब्रिज और अंडरब्रिज का निर्माण भी तेजी से किया जा रहा है। वर्ष 2004-14 के दौरान देशभर में 4,148 पुल बनाए गए थे, जबकि 2014 से जनवरी 2026 तक यह संख्या बढ़कर 14,024 हो गई है, जिनमें उत्तराखंड के 106 पुल शामिल हैं।

इसके अलावा, फरवरी 2026 तक भारतीय रेल में 1,14,196 करोड़ रुपये की लागत से 4,802 पुल स्वीकृत किए गए हैं। इनमें उत्तराखंड में 158 करोड़ रुपये की लागत से 9 पुल विभिन्न चरणों में निर्माणाधीन हैं।

स्टेशन आधुनिकीकरण के तहत “अमृत भारत स्टेशन योजना” में उत्तराखंड के 11 स्टेशनों को शामिल किया गया है। इनमें देहरादून, हरिद्वार, काशीपुर, काठगोदाम, कोटद्वार, रामनगर, रुड़की और टनकपुर जैसे प्रमुख स्टेशन शामिल हैं। इन स्टेशनों पर यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, जिनमें बेहतर प्रतीक्षालय, स्वच्छ शौचालय, लिफ्ट-एस्केलेटर, पार्किंग, दिव्यांगजन सुविधाएं और उन्नत सूचना प्रणाली शामिल हैं। इस योजना के तहत पिछले तीन वर्षों में 6,895 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जिनमें से 6,172 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।

रेल मंत्री ने यह भी बताया कि यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2023-24 से फरवरी 2026 के बीच उत्तराखंड के लिए 18 नई ट्रेन सेवाएं शुरू की गई हैं। इनमें लखनऊ-देहरादून वंदे भारत एक्सप्रेस, दौराई-टनकपुर एक्सप्रेस और हरिद्वार-फिरोजपुर कैंट एक्सप्रेस जैसी प्रमुख ट्रेनें शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि नई ट्रेन सेवाएं मार्ग की क्षमता, उपलब्ध संसाधनों और परिचालन आवश्यकताओं के आधार पर शुरू की जाती हैं।

उत्तराखंड में रेलवे नेटवर्क को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार बहुस्तरीय स्तर पर काम कर रही है। नई रेल लाइनें, सुरंग और पुल निर्माण, स्टेशन आधुनिकीकरण और नई ट्रेन सेवाओं के जरिए खासतौर पर पहाड़ी क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी देने की दिशा में तेजी से प्रगति हो रही है।

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