Uttarakhand SC-ST Act: 2026 में 116 मामले दर्ज, 25 की जांच लंबित; अब डिजिटल सिस्टम से होगी मॉनिटरिंग

Uttarakhand SC-ST Act: 2026 में 116 मामले दर्ज, 25 की जांच लंबित; अब डिजिटल सिस्टम से होगी मॉनिटरिंग

देहरादून। उत्तराखंड में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति से जुड़े अत्याचार के मामलों में जांच, न्यायिक प्रक्रिया और पीड़ितों को मिलने वाली सहायता की अब अधिक व्यवस्थित निगरानी की तैयारी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को सचिवालय में हुई राज्य स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक में लंबित मामलों के समयबद्ध निस्तारण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रभावित व्यक्ति को न्याय और सहायता के लिए अलग-अलग विभागों के चक्कर न लगाने पड़ें और राहत राशि के भुगतान में भी अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।

बैठक अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए आयोजित की गई थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि समिति की बैठक केवल औपचारिक प्रक्रिया बनकर नहीं रहनी चाहिए। दर्ज मामलों में कार्रवाई से लेकर प्रभावित परिवारों की सुरक्षा और पुनर्वास तक की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

2026 में 116 मुकदमे, 25 की विवेचना अभी जारी

बैठक में रखे गए आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2024 में अधिनियम के तहत राज्य में 189 अभियोग दर्ज किए गए थे। वर्ष 2025 में इनकी संख्या 157 रही। वहीं 2026 में 15 सितंबर तक 116 अभियोग दर्ज हुए हैं। इनमें 25 मामलों की विवेचना अभी चल रही है।

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2024 से अब तक लंबित विवेचनाओं की अलग-अलग समीक्षा करने को कहा है। अधिकारियों को यह पता लगाने के निर्देश दिए गए कि मामले किस वजह से लंबित हैं। पुराने और गंभीर मामलों में पुलिस, प्रशासन और अभियोजन विभाग को समन्वय बनाकर कार्रवाई करने को कहा गया है। विशेष न्यायालयों में विचाराधीन मामलों की स्थिति की भी नियमित समीक्षा होगी।

राहत राशि मिलने में देरी की होगी अलग समीक्षा

बैठक में पीड़ितों को दी गई आर्थिक सहायता का ब्योरा भी रखा गया। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2024-25 में 205 पीड़ितों को 228.71 लाख रुपये, 2025-26 में 127 पीड़ितों को 143.16 लाख रुपये और चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में 18 सितंबर तक 104 पीड़ितों को 99.528 लाख रुपये की सहायता दी गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन मामलों में अनुमन्य राहत राशि देने में देरी हुई है, उनकी अलग से समीक्षा की जाए। साथ ही सहायता को केवल आर्थिक मुआवजे तक सीमित न रखते हुए जरूरत के मुताबिक प्रभावित परिवारों को चिकित्सा, शिक्षा, सुरक्षा, काउंसलिंग और पुनर्वास की योजनाओं से भी जोड़ा जाए।

पीड़ित परिवारों के बच्चों की पढ़ाई पर भी नजर

सरकार ने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि किसी घटना के कारण प्रभावित परिवार के बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो। पात्र बच्चों को छात्रवृत्ति और दूसरी शैक्षिक सहायता योजनाओं का लाभ दिलाने के निर्देश दिए गए हैं।

गंभीर और संवेदनशील मामलों में पीड़ित तथा उसके परिवार की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही गई। प्रत्येक जिले में वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर ऐसे मामलों की निगरानी और जवाबदेही तय करने के निर्देश भी दिए गए।

जांच से मुआवजे तक बनेगा डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम

बैठक का एक महत्वपूर्ण फैसला डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने की दिशा में काम करना है। प्रस्तावित व्यवस्था के माध्यम से किसी मामले की विवेचना कहां तक पहुंची, न्यायालय में उसकी क्या स्थिति है, पीड़ित को राहत राशि मिली या नहीं और अन्य सहायता उपलब्ध कराई गई या नहीं—इन पहलुओं की शासन स्तर से निगरानी की जा सकेगी।

जिन जिलों में विवेचना, मामलों के निस्तारण अथवा राहत वितरण की प्रगति अपेक्षा के अनुरूप नहीं होगी, उनकी अलग से समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों की व्यवस्थाओं को दूसरे जिलों के साथ साझा करने की बात भी कही गई।

पुलिसकर्मियों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण

मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को SC-ST अत्याचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों, संवेदनशील मामलों की जांच और पीड़ितों के साथ व्यवहार को लेकर नियमित प्रशिक्षण देने को कहा है। समाज कल्याण, पुलिस और अभियोजन विभाग को मिलकर रिफ्रेशर प्रशिक्षण आयोजित करने के निर्देश दिए गए।

इसके साथ ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में अधिनियम, कानूनी अधिकारों और पीड़ितों को मिलने वाली सहायता की जानकारी पहुंचाने के लिए जागरूकता अभियान चलाने पर भी जोर दिया गया।

फैसलों के साथ तय होगी जिम्मेदारी और समयसीमा

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि बैठक में लिए गए फैसले कार्यवृत्त तक सीमित न रहें। हर निर्णय के क्रियान्वयन के लिए संबंधित विभाग अथवा अधिकारी की जिम्मेदारी और समयसीमा निर्धारित की जाए तथा प्रगति की नियमित समीक्षा हो।

बैठक में समाज कल्याण मंत्री खजान दास, विधायक ममता राकेश, गृह सचिव शैलेश बगौली, समाज कल्याण सचिव श्रीधर बाबू अद्दांकी, सचिव एवं आयुक्त राजस्व परिषद रंजना राजगुरु, अपर पुलिस महानिदेशक ए.पी. अंशुमान, आईजी बरिंदरजीत सिंह, समाज कल्याण निदेशक संजय कुमार और जनजाति कल्याण निदेशक संजय टोलिया सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

 

 

 

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