देहरादून। उत्तराखंड में किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर के खतरे से बचाने के लिए चलाए जा रहे HPV टीकाकरण अभियान ने रफ्तार पकड़ ली है। प्रदेश में निर्धारित 95 हजार के लक्ष्य के मुकाबले सितंबर 2026 तक करीब 65 हजार किशोरियों का टीकाकरण किया जा चुका है। यानी राज्य करीब 69 प्रतिशत लक्ष्य तक पहुंच गया है। जिलों की बात करें तो चमोली ने शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया है, जबकि पिथौरागढ़ करीब 96 प्रतिशत टीकाकरण के साथ आगे चल रहा है।
अभियान में उन किशोरियों को HPV वैक्सीन दी जा रही है, जो 14 वर्ष की आयु पूरी कर चुकी हैं और अभी 15 वर्ष की नहीं हुई हैं। स्वास्थ्य विभाग अब बाकी पात्र किशोरियों की पहचान कर उन्हें टीकाकरण से जोड़ने पर विशेष जोर दे रहा है।
चमोली ने लक्ष्य पूरा किया, ऊधमसिंह नगर में 86 फीसदी कवरेज
जिला रैंकिंग डैशबोर्ड के अनुसार HPV टीकाकरण में चमोली 100 प्रतिशत उपलब्धि के साथ सबसे आगे है। पिथौरागढ़ में करीब 96 प्रतिशत और ऊधमसिंह नगर में लगभग 86 प्रतिशत लक्षित लाभार्थियों का टीकाकरण हो चुका है। दूसरे जिलों में भी कवरेज बढ़ाने के लिए अभियान तेज किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग की रणनीति अब उन किशोरियों तक पहुंचने की है, जो किसी कारण से अभी तक टीका नहीं लगवा पाई हैं। इसके लिए आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से पात्र किशोरियों की सूची तैयार और अपडेट की जा रही है। टीकाकरण सत्र में नहीं पहुंचने, परिवार की हिचकिचाहट, संपर्क नहीं हो पाने या प्रवास जैसे कारणों से छूटी किशोरियों को अलग-अलग श्रेणियों में चिह्नित कर फॉलोअप किया जा रहा है।
क्यों जरूरी माना जा रहा HPV टीकाकरण?
ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) का संक्रमण सर्वाइकल कैंसर के प्रमुख कारणों में से एक है। किशोरावस्था में HPV वैक्सीन लगाने से भविष्य में HPV संक्रमण और उससे संबंधित सर्वाइकल कैंसर से बचाव में महत्वपूर्ण मदद मिलती है। इसी कारण पात्र उम्र में टीकाकरण को महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय माना जाता है।
स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के मुताबिक सरकार का प्रयास प्रदेश की प्रत्येक पात्र किशोरी तक समय पर HPV वैक्सीन पहुंचाने का है। इसके साथ टीकाकरण को लेकर मौजूद भ्रांतियों और हिचकिचाहट को तथ्यात्मक जानकारी के जरिए दूर करने पर भी काम किया जा रहा है।
स्कूलों के जरिए किशोरियों और अभिभावकों तक पहुंच
अभियान को प्रभावी बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने शिक्षा विभाग को भी साथ जोड़ा है। स्कूलों की प्रार्थना सभाओं में छात्र-छात्राओं को HPV संक्रमण, उससे जुड़े स्वास्थ्य जोखिम और सर्वाइकल कैंसर से बचाव में टीकाकरण की भूमिका के बारे में जानकारी दी जा रही है।
अभिभावकों से भी संवाद किया जा रहा है, ताकि वैक्सीन को लेकर उनकी आशंकाओं का समाधान किया जा सके। स्वास्थ्य विभाग का फोकस किशोरियों के साथ उनके परिवारों तक सही जानकारी पहुंचाने पर है।
अब HPV KAVACH से होगी निगरानी
HPV टीकाकरण की निगरानी को और मजबूत करने के लिए ‘HPV KAVACH—HPV Program SMART Dashboard’ विकसित किया जा रहा है। इसके माध्यम से टीकाकरण की प्रगति, कवरेज, आयोजित सत्रों और वैक्सीन स्टॉक पर नजर रखने की योजना है।
रियल टाइम डेटा और अलर्ट की मदद से कम टीकाकरण वाले क्षेत्रों की पहचान करने के साथ वैक्सीन स्टॉक से जुड़ी संभावित समस्या का समय रहते पता लगाया जा सकेगा।
हर रविवार ‘Pink Day’, अभियान के बाद भी जारी रहेगा टीकाकरण
HPV वैक्सीन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए राज्य के स्वास्थ्य केंद्रों में प्रत्येक रविवार ‘Pink Day’ मनाया जा रहा है। इसके जरिए किशोरियों और अभिभावकों को टीके से जुड़ी जानकारी देने और गलत धारणाओं को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग HPV टीकाकरण को केवल मौजूदा अभियान तक सीमित नहीं रखना चाहता। आगे ऐसी नियमित व्यवस्था विकसित करने की योजना है, जिसमें बालिका के 14 वर्ष की आयु पूरी करते ही समय पर टीकाकरण सुनिश्चित किया जा सके।
