पंचकूला (हरियाणा)। देश में विज्ञान और तकनीकी नवाचार के सबसे बड़े आयोजनों में शामिल इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल–2025 का आगाज 6 दिसंबर से दशहरा मैदान में हुआ है। चार दिवसीय इस महोत्सव का उद्घाटन केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने किया। आयोजन में देशभर से वैज्ञानिक, शोधार्थी, नीति विशेषज्ञ और युवा नवप्रवर्तक जुटे हैं, जो विज्ञान के विविध आयामों पर मंथन कर रहे हैं।
फेस्टिवल के दूसरे दिन आयोजित साइंस एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल मीट ने राज्यों के विज्ञान-तंत्र की दिशा और दशा को रेखांकित किया। इस बैठक का उद्घाटन हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने किया। देश के 28 राज्यों की विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषदों ने अपने-अपने कार्यों, योजनाओं और भविष्य के विजन को मंच से साझा किया। इस दौरान अनुसंधान, तकनीकी विकास, स्टार्टअप इकोसिस्टम और स्थानीय नवाचार को लेकर गंभीर विचार-विमर्श हुआ।
उत्तराखंड की ओर से यू-कॉस्ट (उत्तराखंड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद) का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. आशुतोष मिश्रा ने किया। उन्होंने परिषद की वर्तमान उपलब्धियों और जारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करते हुए कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां और प्राकृतिक संपदा इसे शोध के लिए एक विशिष्ट प्रयोगशाला बनाती हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि राज्य में रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर, उच्चस्तरीय लैब और पेटेंट सपोर्ट सिस्टम को और मजबूत किया जाए, तो उत्तराखंड कई क्षेत्रों में देश का अग्रणी राज्य बन सकता है।
डॉ. मिश्रा ने बताया कि पर्वतीय पारिस्थितिकी, जैव विविधता, औषधीय पौधों, जल संरक्षण, आपदा प्रबंधन, टिकाऊ पर्यटन और जैविक कृषि जैसे क्षेत्रों में उत्तराखंड की अपार संभावनाएं हैं। इन संभावनाओं को ठोस उपलब्धियों में बदलने के लिए केंद्र और राज्य के बीच और अधिक तकनीकी सहयोग की आवश्यकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रो. दुर्गेश पंत के मार्गदर्शन में यू-कॉस्ट कई नई योजनाओं को धरातल पर उतार रहा है, जिनका उद्देश्य छात्रों, शोधकर्ताओं और नवाचारकर्ताओं को प्रोत्साहित करना है। राज्य की अपनी विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति के लागू होने से आने वाले वर्षों में उत्तराखंड में रिसर्च और स्टार्टअप गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
बैठक में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, नई दिल्ली के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न राज्यों के परिषद प्रमुख और वैज्ञानिक विशेषज्ञ मौजूद रहे। समापन सत्र में अंतर-राज्यीय शोध सहयोग, साझा प्रयोगशालाओं और संयुक्त नवाचार कार्यक्रमों को बढ़ावा देने पर सहमति बनी।
इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल–2025 इस बात का जीवंत प्रमाण बनकर उभरा है कि विकसित भारत के निर्माण में विज्ञान और तकनीक की भूमिका अब केवल विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता बन चुकी है।
