कैनवास पर जीवित हुईं कृतिका की यादें, ‘स्मरण’ कला प्रदर्शनी में दिखी रचनात्मकता की अनूठी दुनिया

कैनवास पर जीवित हुईं कृतिका की यादें, ‘स्मरण’ कला प्रदर्शनी में दिखी रचनात्मकता की अनूठी दुनिया

देहरादून। रंगों, रेखाओं और भावनाओं के अद्भुत संगम से सजी “Echoes of Expression : स्मरण” कला प्रदर्शनी इन दिनों कला प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। यशकृतिका फाउंडेशन की ओर से आयोजित यह सात दिवसीय चित्रकला प्रदर्शनी एवं कार्यशाला स्वर्गीय कृतिका उनियाल की स्मृति और उनकी तृतीय पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित की जा रही है। 14 मई से शुरू हुआ यह आयोजन 20 मई तक चलेगा।

प्रदर्शनी में कैनवास पर उकेरे गए रंगों ने न केवल कलाकारों की कल्पनाओं को जीवंत किया, बल्कि दर्शकों को कला की भावनात्मक दुनिया से भी जोड़ दिया। कहीं प्रकृति के सौंदर्य को रंगों में पिरोया गया, तो कहीं सामाजिक सरोकारों और मानवीय भावनाओं को चित्रों के माध्यम से अभिव्यक्ति दी गई। प्रदर्शनी में आधुनिक कला, पारंपरिक शैली और प्रयोगधर्मी चित्रों का सुंदर मिश्रण देखने को मिला।

कार्यक्रम का उद्घाटन संस्कृति विभाग उत्तराखंड के निदेशक प्रदीप जोशी की उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर संस्था की संस्थापक कमलेश नेगी और यशपाल उनियाल ने स्वर्गीय कृतिका उनियाल के कला के प्रति समर्पण और उनकी रचनात्मक यात्रा को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि कृतिका उनियाल ने अपनी कला के माध्यम से संवेदनाओं को रंगों में ढालने का जो प्रयास किया, वही इस आयोजन की प्रेरणा है।

प्रदर्शनी में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश सहित देशभर के कलाकारों ने अपनी उत्कृष्ट कलाकृतियों का प्रदर्शन किया। प्रसिद्ध कलाकार जाकिर हुसैन, चंद्र बहादुर रसाइली, रवि चरण और सुनील कुमार समेत कई वरिष्ठ एवं युवा कलाकारों की सहभागिता ने आयोजन को खास बना दिया। हर कलाकार की चित्रशैली अलग नजर आई। कहीं रंगों की गहराई थी तो कहीं सूक्ष्म रेखांकन की खूबसूरती ने दर्शकों को प्रभावित किया।

प्रदर्शनी के दौरान लाइव डेमोंस्ट्रेशन भी आयोजित किए जा रहे हैं, जहां कलाकार दर्शकों के सामने ही कैनवास पर अपनी कल्पनाओं को आकार दे रहे हैं। ब्रश की हर चाल, रंगों का संयोजन और चित्रकारी की बारीकियां कला प्रेमियों के लिए सीखने का विशेष अवसर बन रही हैं। युवा कलाकार और विद्यार्थी बड़ी संख्या में यहां पहुंचकर चित्रकला की नई तकनीकों को समझ रहे हैं।

आयोजकों के अनुसार “स्मरण” केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि कला, संवेदना और स्मृतियों का ऐसा मंच है, जहां रंगों के माध्यम से भावनाओं को नई अभिव्यक्ति मिलती है। यही वजह है कि यह आयोजन हर वर्ष कला जगत के लिए एक विशेष उत्सव के रूप में पहचान बना रहा है।

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