विकासनगर रजिस्ट्री कार्यालय में बड़ा घोटाला, गोल्डन फॉरेस्ट की प्रतिबंधित जमीनों की कर दी रजिस्ट्री

विकासनगर रजिस्ट्री कार्यालय में बड़ा घोटाला, गोल्डन फॉरेस्ट की प्रतिबंधित जमीनों की कर दी रजिस्ट्री

देहरादून। विकासनगर स्थित उप निबंधक कार्यालय में जिलाधिकारी सविन बंसल की छापामार कार्रवाई में वर्षों से चल रहे कथित स्टांप चोरी और अवैध रजिस्ट्रियों के खेल का खुलासा हुआ है। जांच के दौरान मा० उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रतिबंधित गोल्डन फॉरेस्ट की जमीनों से जुड़ी करीब 150 संदिग्ध रजिस्ट्रियां सामने आई हैं। मामले को गंभीर मानते हुए जिला प्रशासन ने उप निबंधक अपूर्वा सिंह के निलंबन और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेज दी है।

जिलाधिकारी ने हाल ही में उप निबंधक कार्यालय विकासनगर का औचक निरीक्षण किया था। इस दौरान कार्यालय में वर्ष 2018 से लेकर 2025 तक के सैकड़ों मूल विलेख पत्र संदिग्ध परिस्थितियों में पड़े मिले। कई दस्तावेज ऐसे पाए गए, जिन्हें पंजीकरण के बाद भी महीनों और वर्षों तक संबंधित पक्षों को जारी नहीं किया गया था। प्रशासन ने इन अभिलेखों को कब्जे में लेकर विस्तृत जांच शुरू कर दी है।

जांच में यह भी सामने आया कि 25 रजिस्ट्रियां बिना किसी स्पष्ट कारण के लंबे समय से लंबित रखी गई थीं। इन मामलों में अभिलेखीकरण और सूचना प्रक्रिया तक पूरी नहीं की गई थी। अधिकारियों से पूछताछ में भी संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका।

प्रारंभिक जांच में गोल्डन फॉरेस्ट से जुड़ी प्रतिबंधित भूमि के क्रय-विक्रय के कई मामले सामने आए हैं। जिला प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि आखिर न्यायालयीय रोक के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में रजिस्ट्रियां कैसे की गईं। मामले में पूर्व में तैनात सब-रजिस्ट्रारों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई गई है।

निरीक्षण के दौरान स्टांप शुल्क चोरी से जुड़े धारा 47-ए के तहत 47 मामले भी चिन्हित किए गए हैं। प्रशासन का अनुमान है कि इन अनियमितताओं से सरकारी राजस्व को करोड़ों रुपये की क्षति पहुंची हो सकती है। साथ ही, कई लोगों के साथ जमीन खरीद के नाम पर धोखाधड़ी होने की आशंका भी जताई जा रही है।

जांच में रिकॉर्ड प्रबंधन, अभिलेख रखरखाव और कार्यालय संचालन में गंभीर खामियां भी सामने आई हैं। जिलाधिकारी ने पूरे प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि दोषियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कदम भी उठाए जाएंगे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की जीरो टॉलरेंस नीति का हवाला देते हुए जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भूमि और राजस्व से जुड़े मामलों में भ्रष्टाचार या अनियमितता किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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